चीन ने कैलाश मानसरोवर का रास्ता रोका बनाया मिसाइल-बेस पर मोदी की चुप्पी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 17 जुलाई 2024 | कैलाश मानसरोवर : 2020 के बाद यह लगातार पांचवां साल है, जब चीन भारतीयों को कैलाश मानसरोवर जाने से रोक रहा है। अभी भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के दो रास्ते हैं। फिलहाल इन दोनों रास्तों पर रोक है। सबसे बड़ी बात यह है कि मोदी सरकार इस मसाले पर चुप्पी साधे हुए है। विदेश मंत्री भी चुप हैं। लगता है शिवभक्त हिंदुओं को कैलाश मानसरोवर के दर्शन दूरबीन से करने पड़ेंगे। 

चीन ने कैलाश मानसरोवर का रास्ता रोका बनाया मिसाइल-बेस पर मोदी की चुप्पी

15 जुलाई 2024 को मोदी सरकार 2.1 ने एक RTI के जवाब में कहा है कि पवित्र धार्मिक स्थल पर जाने से रोककर चीन दो अहम समझौते को तोड़ रहा है। इसके अलावा चीन इसी इलाके में एक मिसाइल साइट्स भी बना रहा है। पर मोदी की ऐतिहासिक चुप्पी बरक़रार है! 

चीन ने कैलाश मानसरोवर का रास्ता रोका बनाया मिसाइल-बेस पर मोदी की चुप्पी

भारत से गलवान और पैंगोंग झील इलाके में मुंह की खाने के बाद भी चीन अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीनी एयरफोर्स भारत से सटे समूचे बॉर्डर पर हवाई किलेबंदी को मजबूत कर रही है।

वहीं, ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन कैलास मानसरोवर के पास जमीन से हवा में मार करने वाली (SAM Missile) मिसाइलों को तैनात किया है। माना जा रहा है कि भारतीय वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमानों के शामिल होने के बाद से डरा चीन अपनी हवाई सीमा को सुरक्षित बनाने में जुट गया है।

मानसरोवर के पास बनाया मिसाइल साइट

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस detresfa की सैटलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन कैलास मानसरोवर के इलाके में न केवल अपनी सैन्य तैनाती को बढ़ाया है। बल्कि, वह मानसरोवर के पास एक मिसाइल साइट का निर्माण भी कर रहा है।

इस इलाके में 100 किमी की GEOINT स्कैनिंग से पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की ऐक्टिविटी का पता चला है। Epoch Times के अनुसार, चीन की बॉर्डर इलाके में मिसाइल साइट बनाने की चाल उसकी आक्रमक रवैये से बिलकुल मेल खाता है। चीन नहीं चाहता कि सीमा पर शांति हो। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से सीमा पर तनाव और बढ़ने की उम्मीद है।

सवाल 1: कैलाश मानसरोवर कहां है?

जवाब: कैलाश मानसरोवर का ज्यादातर एरिया तिब्बत में है। वही तिब्बत, जिस पर चीन अपना अधिकार बताता है। कैलाश पर्वत श्रेणी कश्मीर से भूटान तक फैली हुई है। इस इलाके में ल्हा चू और झोंग चू नाम की दो जगहों के बीच एक पहाड़ है। यहीं पर इस पहाड़ के दो जुड़े हुए शिखर हैं। इसमें से उत्तरी शिखर को कैलाश के नाम से जाना जाता है।

इस शिखर का आकार एक विशाल शिवलिंग जैसा है। उत्तराखंड के लिपुलेख से यह जगह सिर्फ 65 किलोमीटर दूर है। फिलहाल कैलाश मानसरोवर का बड़ा इलाका चीन के कब्जे में है। इसलिए यहां जाने के लिए चीन की अनुमति चाहिए होती है।

सवाल 2: कैलाश मानसरोवर का क्या महत्व है और इसको लेकर अभी विवाद क्यों शुरू हुआ है?

जवाब: हिंदू धर्म में ये मान्यता है कि भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। यही वजह है कि हिंदुओं के लिए ये बेहद पवित्र जगह है। जैन धर्म में ये मान्यता है कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ ने यहीं से मोक्ष की प्राप्ति की थी। 2020 से पहले हर साल करीब 50 हजार हिंदू यहां भारत और नेपाल के रास्ते धार्मिक यात्रा पर जाते हैं।

2020 से चीन, भारतीयों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा की इजाजत नहीं दे रहा है। इसी महीने भारत सरकार ने एक RTI के जवाब में कहा है कि कैलाश मानसरोवर जाने से रोककर चीन 2013 और 2014 में हुए दो प्रमुख समझौते तोड़ रहा है।

न्यूज 18 के मुताबिक मोदी सरकार ने कहा है कि चीन अपने मनमुताबिक एकतरफा फैसला लेकर इन समझौतों को नहीं तोड़ सकता है। अगर चीन को भारत के साथ किए इस समझौते में कोई बदलाव करना है तो वह भारत सरकार के साथ सहमति से ही ऐसा कर सकता है।

सवाल 3: कैलाश मानसरोवर जाने के लिए भारत और चीन के बीच हुए किन दो समझौतों को चीन तोड़ रहा है?

जवाब: कैलाश मानसरोवर जाने के लिए भारत और चीन के बीच दो प्रमुख समझौते हुए हैं…

पहला समझौता: 20 मई 2013 को भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रा मार्ग से होकर कैलाश मानसरोवर जाने के लिए ये समझौता हुआ। उस समय के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच यह समझौता हुआ था। इससे यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रा मार्ग खुल गया।

दूसरा समझौता: 18 सितंबर 2014 को नाथूला के जरिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते को लेकर भारत और चीन में ये समझौता हुआ था। विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री वांग यी के साथ ये समझौता किया था।

दोनों समझौते की भाषा लगभग एक समान है। ये समझौते दोनों देशों के विदेश मंत्री के पेपर पर हस्ताक्षर के दिन से लागू हैं। हर 5 साल के बाद ऑटोमेटिक तरीके से इसकी समय सीमा बढ़ाने की बात समझौते में लिखी है।

ऐसा तब तक होगा, जब तक कि कोई भी पक्ष समझौते को तोड़ने के अपने इरादे के बारे में समाप्ति की तारीख से छह महीने पहले लिखित रूप में दूसरे देश को नोटिस न दे।

इस समझौते में ये भी कहा गया है कि दोनों पक्ष जरूरत के हिसाब से आम सहमति से प्रोटोकॉल में बदलाव भी कर सकते हैं। भारत सरकार का कहना है कि चीन ने 6 महीने पहले बताए बिना ही भारतीयों लोगों के कैलाश मानसरोवर जाने पर रोक लगा दी है। यह एकतरफा फैसला है, जो गलत है।

सवाल 4: क्या नेपाल से होकर भारतीय कैलाश मानसरोवर जा सकते हैं और इसके लिए चीन का वीजा जरूरी है?

जवाब: किसी भी रास्ते से कैलाश मानसरोवर जाने के लिए भारतीयों के पास चीन का वीजा होना जरूरी है। भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के दो रास्ते हैं, जबकि कुछ लोग नेपाल के रास्ते भी यहां जाते हैं।

नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट का दावा है कि पिछले साल नेपाल से होकर कैलाश मानसरोवर जाने वाले 50 हजार यात्रियों को चीन ने इजाजत नहीं दी। इनमें नेपाल और भारत दोनों देशों के लोग शामिल हैं। भारतीयों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ये नियम इतना ज्यादा कड़े हैं कि भारतीयों के लिए नेपाल से होकर भी कैलाश मानसरोवर जाना मुश्किल हो गया है।

मई 2023 में एसोसिएशन ऑफ कैलाश टूर ऑपरेटर्स नेपाल (AKTON) ने नेपाल में चीनी राजदूत चेन सोंग को पत्र लिखकर कैलाश यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए नियम में बदलाव की मांग की थी। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस कड़े नियम की वजह से उनके परिवार की आमदनी न के बराबर हो गई है।

‘विऑन न्यूज वेबसाइट’ के मुताबिक भारतीय तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर भेजने वाली नेपाली कंपनियों को 60,000 डॉलर यानी 8 मिलियन नेपाली रुपए चीन सरकार के पास एडवांस में जमा करने होते हैं। चीन ने ये नियम 2020 के बाद बाद बनाए हैं।

चीन कब्जे वाले तिब्बत पर्यटन ब्यूरो ने भारतीयों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पैकेज की कीमत एक व्यक्ति के लिए 1800 अमेरिकी डॉलर यानी 1.5 लाख से बढ़ाकर 3000 अमेरिकी डॉलर यानी 2.50 लाख कर दी है। इतना ही नहीं नेपाल में कैलाश मानसरोवर जाने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को खुद मौजूद रहना जरूरी है।

उनके बायोमेट्रिक लिए जाते हैं। इस तरह अब नियम इतने कड़े हो गए हैं कि भारतीयों के लिए यहां जाना लगभग असंभव है। जनवरी 2024 में 38 भारतीय नेपाल के नेपालगंज से चार्टर्ड विमान के जरिए ‘कैलाश मानसरोवर दर्शन के लिए गए थे।

सवाल 5: चीन भारतीयों को कैलाश मानसरोवर जाने से क्यों रोक रहा है?

जवाब: ORF के फेलो और विदेश मामलों के जानकार सुशांत सरीन कहते हैं कि पहली बात तो ये है कि चीन ऐसा फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। कैलाश मानसरोवर का हिस्सा उसके कब्जे में है, ऐसे में वह चाहे तो आपको वहां जाने देगा और नहीं चाहेगा तो नहीं जाने देगा। भले ही इससे किसी की भी धार्मिक भावनाएं आहत हों।

किसी धार्मिक स्थल पर जाने को लेकर कोई इंटरनेशनल कानून नहीं, बल्कि उस देश का कानून लागू होता है। कल को पाकिस्तान चाहे तो करतारपुर कॉरिडोर बंद कर सकता है। इसी तरह सऊदी अरब मक्का मदीना जाने वालों को लेकर कानून बनाता है।

अब दूसरी बात ये है कि अगर चीन भारत के साथ किए 2 समझौते को तोड़कर भारतीयों को कैलाश मानसरोवर जाने से रोक रहा है तो इसका मतलब है कि दोनों देशों के रिश्ते सही नहीं हैं। चीन यह बताने की कोशिश कर रहा है कि भारत अगर ताइवान, साउथ चाइना शी में चीन के खिलाफ जाएगा तो उसे LAC पर ही इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

वहीं, डिफेंस एक्सपर्ट जे.एस. सोढी का कहना है कि 2019 में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद चीन ने दो आक्रामक फैसले लिए…

  • गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों से झड़प।
  • कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय लोगों पर रोक।

सोढ़ी का कहना है कि LAC पर 50 हजार जवानों की तैनाती। कई मौकों पर अलग-अलग जगहों पर सैनिकों में भिड़ंत। 2025 तक पूरे जिंजियांग प्रांत में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाकर तैयार करने का लक्ष्य और अब कैलाश मानसरोवर जाने से भारतीयों को रोकना। ये सारी बातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि भारत और चीन के संबंध काफी बुरे दौर की तरफ बढ़ रहे हैं।

सवाल 6: भारत सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने के लिए क्या प्रयास किए हैं?

जवाब: 26 जून 2017 में आखिरी बार चीन ने ये बयान जारी किया था कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसकी भारत सरकार के साथ बातचीत हो रही है। चीन ने अपने बयान में कहा कि लिपुलेख के रास्ते यात्री कैलाश पर्वत तक जा सकेंगे, लेकिन फिलहाल सिक्किम के नाथूला से होकर कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते पर रोक लगाई गई है। 1981 में लिपुलेख से होकर मानसरोवर जाने की यात्रा शुरू हुई थी।

नाथूला से होकर कैलाश पर्वत जाने पर पाबंदी दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प की वजह से लगाई गई थी। 2020 के बाद से दोनों देशों के बीच यात्रा शुरू करने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।

भारत सरकार ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 90 किलोमीटर दूर धारचूला में ओल्ड लिपुपास चोटी पर भी एक ऐसी जगह को विकसित किया है, जहां से कैलाश पर्वत की चोटी नजर आती है। इस जगह से कैलाश पर्वत करीब 50 किलोमीटर दूर है।

5 जुलाई को पिथौरागढ़ की जिलाधिकारी रीना जोशी ने बताया है कि 15 सितंबर से लिपुलेख के पास ओल्ड लिपुपास चोटी से कैलाश पर्वत के दर्शन शुरू हो जाएंगे। सीधे कैलाश पर्वत की चोटी यहां से नजर आती है।

इसके अलावा यात्री दूरबीन के जरिए भी यहां से कैलाश पर्वत और कैलाश मानसरोवर के खूबसूरत हिस्से को देख सकेंगे। पूजा-पाठ की व्यवस्था भी यहां की जा रही है। ओल्ड लिपुपास जाने के लिए लिपुलेख तक गाड़ी से और फिर कैलाश पर्वत को देखने के लिए लगभग 800 मीटर पैदल चलना होता है।

सवाल 7: क्या चीन कैलाश मानसरोवर के पास मिसाइल तैनात करने की कोशिश कर रहा है?

जवाब: अगस्त 2020 में ‘दि प्रिंट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारतीयों को कैलाश मानसरोवर जाने से रोककर चीन यहां मिसाइल साइट्स बना रहा है। एक सैटेलाइट इमेज में भारतीय सीमा लिपुलेख से 100 किलोमीटर की दूरी पर चीन एक मिसाइल साइट्स बनाता दिख रहा है। रिपोर्ट में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों यानी SAM की तैनाती के लिए ये साइट्स बनाए जाने का दावा किया गया।

चीन ने 7 जगहों पर तैनात कीं SAM मिसाइलें

चीन ने लद्दाख से सटे अपने रुटोग काउंटी, नागरी कुंशा एयरपोर्ट, उत्‍तराखंड सीमा पर मानसरोवर झील, सिक्किम से सटे श‍िगेज एयरपोर्ट और गोरग्‍गर हवाई ठिकाने, अरुणाचल प्रदेश से सटे मैनलिंग और लहूंजे में सतह से हवा में मार करने वाली म‍िसाइलें तैनात की हैं।

इन ठिकानों पर चार से पांच म‍िसाइल लॉन्‍चर तैनात हैं। इसके अलावा उनकी मदद के लिए रेडॉर और जेनेटर भी दिखाई दे रहे हैं। कुछ तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि चीनी मिसाइलें भारत से होने वाले किसी हवाई हमले के खतरे को देखते हुए पूरे अलर्ट मोड में है।

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पाकिस्तान में हिंदू बोले “यहां खुश हैं, कोई भेदभाव नहीं होता”, भारतीय गोदी मीडिया की खबरें झूठी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 13 मार्च 2025 | जयपुर : भारत में गोदी मीडिया कि खबरों में आपने अक्सर सुना-देखा होगा कि बंटवारे के वक्त पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 15 फीसदी थी। वर्तमान में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी मात्र 1% रह गयी है।

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या फिर इस कम होती आबादी का कारण पाकिस्तान में हिंदुओं पर किये जा रहे अत्याचार हैं, जिनकी वजह से हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाया जा रहा है। या विरोध करने पर हिंदुओं के मंदिर तोड़े जा रहे हैं, हिंदुओं की बहन बेटियों की इज्ज़त लूटी जा रही है, इस कारण पाकिस्तान में हिन्दू 15% से मात्र 1% रह गये हैं।

पर यह सब गोदी मीडिया की खबरें यादृच्छिक, झूठी, बनावटी और मनगढ़ंत हैं और या तो अपनी टीआरपी बढ़ने के लिए प्रसारित होती हैं या फिर भारत में नफ़रत फ़ैलाने के लिये। 

 वास्तविकता यह है कि ‘मैं हिंदू हूं, पाकिस्तान में रहती हूं। मुझे यहां कोई परेशानी नहीं होती। हम खुलकर रहते हैं। त्योहार मनाते हैं। एंजॉय करते हैं। यहां की सरकार हमारे लिए प्रोग्राम करवाती है। हमें सिक्योरिटी देती है। हमारे आसपास काफी मुस्लिम रहते हैं, लेकिन उनकी वजह से हमें कोई दिक्कत नहीं है।’

पति धनराज और बच्चे के साथ कराची के रत्नेश्वर मंदिर आईं नीतू के इस जवाब से मुझे हैरानी हुई। मैंने उनसे पूछा था कि भारत में ऐसी खबरें आती हैं कि यहां हिंदुओं के हालात अच्छे नहीं हैं। वे पूजा नहीं कर सकते, त्योहार नहीं मना सकते। मंदिरों की स्थिति भी ठीक नहीं है।

दैनिक भास्कर के रिपोर्टर बिक्रम प्रताप सिंह का कहना है कि चैंपियंस ट्रॉफी की कवरेज के लिए मैं पाकिस्तान पहुंचा, तो मुझे भी ऐसा ही लगता था। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि वाले दिन मैं इस्लामाबाद में था। एक लोकल जर्नलिस्ट ने मुझसे कहा कि आपको आज कराची में होना चाहिए था।

वहां एक शिव मंदिर है, जहां शिवरात्रि पर 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। मंदिर के बारे में मान्यता है कि वहां भगवान शिव की तीसरी आंख मौजूद है और वह किसी भी मुसीबत से कराची को बचाकर रखती है।

ये कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर का एंट्री गेट है। ये मंदिर अपने शिवरात्रि उत्सव के लिए मशहूर है। फोटो में दिख रहीं सीढ़ियां मंदिर के अंदर ले जाती हैं।

कराची के मशहूर क्लिफ्टन बीच पर है रत्नेश्वर महादेव मंदिर

मैं इस्लामाबाद की कवरेज के बाद कराची पहुंचा। यहां शिवमंदिर के बारे में पता किया। ये मंदिर शहर की प्राइम लोकेशन में से एक क्लिफ्टन बीच के पास है। मंदिर की ओर जाते वक्त मैं यही सोच रहा था कि ये बुरी हालत में होगा। लोग डर के माहौल में वहां आते होंगे।

शाम 7 बजे मंदिर पहुंचा, तो देखा कि मेन गेट लाइट्स से जगमगा रहा था। पूरा परिसर काफी व्यवस्थित है। मैं माइक के साथ गया था, इसलिए मुझे दरवाजे पर रोक दिया गया। ये कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर का एंट्री गेट है। ये मंदिर अपने शिवरात्रि उत्सव के लिए मशहूर है। फोटो में दिख रहीं सीढ़ियां मंदिर के अंदर ले जाती हैं।

ये रत्नेश्वर मंदिर का बाहरी कैंपस है। पूरा कैंपस सुंदर तरीके से सजाया गया है। हालांकि, आम दिनों में यहां कम ही भीड़ रहती है।

मैंने कहा कि मैं भारत से आया हूं। मंदिर की कवरेज करनी है। जवाब मिला- आप अंदर जाकर पूजा कर सकते हैं, मीडिया कवरेज के लिए इजाजत लेनी पड़ेगी। फिर गेट पर खड़े शख्स ने किसी को फोन किया। ये रत्नेश्वर मंदिर का बाहरी कैंपस है। पूरा कैंपस सुंदर तरीके से सजाया गया है। हालांकि, आम दिनों में यहां कम ही भीड़ रहती है।

दूसरी ओर मौजूद शख्स से मेरी बात कराई। वे पाकिस्तान हिंदू पंचायत के महासचिव रवि डडानी थे। रवि ने गेट पर खड़े शख्स से कहा कि मुझे माइक के साथ अंदर जाने दें। साथ ही बताया कि वे भी कुछ देर में पहुंच रहे हैं।

जमीन से नीचे 6 लेवल पर बना मंदिर, आखिरी लेवल पर महादेव की मूर्ति

आमतौर पर किसी मंदिर में सीढ़ियां चढ़ने के बाद भगवान के दर्शन होते हैं। रत्नेश्वर मंदिर में सीढ़ियां नीचे की ओर जाती हैं। ये मंदिर जमीन की सतह से काफी नीचे है। कुल 6 लेवल हैं, सबसे निचले लेवल पर भगवान शिव विराजमान हैं।

मंदिर के सबसे आखिरी लेवल पर शिवलिंग है। ऊपर के लेवल पर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं।

हिंदू बोले- यहां खुश हैं, कोई भेदभाव नहीं होता

परिसर के अंदर जाते हुए मुझे कई भक्त मिले। मैंने सोचा कि इससे पहले कि यहां के व्यस्थापक आएं, इन लोगों से बात कर लेता हूं। हो सकता है कि उनके आने के बाद ये खुलकर बात न करें। यहीं कराची की रहने वाली नीतू मिलीं। मैंने उनसे पूछा कि क्या हिंदू होने की वजह से आपको पाकिस्तान में कोई दिक्कत होती है। उन्होंने जवाब दिया- बिल्कुल नहीं।

मैंने पूछा- कभी इंडिया आने का मन करता है? नीतू कहती हैं, ‘दिल तो करता है कि वहां जाएं।’ तभी उनके पति धनराज बोलने लगते हैं, ‘जम्मू में वैष्णो देवी मंदिर जाने की इच्छा है। हमारा गांव भी इंडिया में है, लेकिन कभी वहां जा नहीं पाए।’ मंदिर के सबसे आखिरी लेवल पर शिवलिंग है। ऊपर के लेवल पर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं।

मंदिर में ही मिले कैलाश कुमार कहते हैं, ‘यहां हमारी अच्छी लाइफ है। अच्छे तरीके से सभी त्योहार मनाते हैं। अभी होली आने वाली है। हम इसकी तैयारी कर रहे हैं।’ कैलाश के साथ आईं लता बताती हैं, ‘पहले हमारा परिवार उमरकोट में रहता था। कराची आए 40 साल से ज्यादा हो गए। भोलेनाथ की दया से सब ठीक है।’

भारत में किस मंदिर में दर्शन करने जाना चाहती हैं, लता जवाब देती हैं- ‘हरिद्वार। अगर गए तो सभी मंदिरों में जाएंगे।’ बगल में लक्ष्य खड़े थे। उम्र करीब 20 साल होगी। मैंने पूछा- ‘आप कभी मार्केट जाते हैं और खुद को हिंदू बताते हैं, आपके साथ कोई भेदभाव होता है?’ लक्ष्य बताते हैं, ‘नहीं। यहां सभी हमें भाई समझते हैं। हमारे साथ कभी भेदभाव नहीं होता।’

मंदिर का मेंटेनेंस हिंदू संगठन के पास, सरकार से मदद नहीं लेते

कुछ देर में पाकिस्तान हिंदू पंचायत के महासचिव रवि डडानी आ गए। उनके साथ पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों के रखरखाव के लिए बने विभाग के प्रमुख कृष्ण शर्मा भी थे। रवि बताते हैं, ‘2014 में यहां पास में एक फ्लाईओवर बनना शुरू हुआ था।

कंस्ट्रक्शन की वजह से मंदिर में दरारें आने लगीं। पाकिस्तान हिंदू पंचायत ने कंस्ट्रक्शन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को पाकिस्तान की धरोहर बताते हुए फ्लाईओवर का काम रुकवा दिया।’

कराची में 50 से ज्यादा मंदिर, पाकिस्तान में 4 हजार मंदिरों में होती है पूजा

रवि डडानी के साथ मौजूद कृष्ण शर्मा मंदिरों के रखरखाव का काम देखने वाले सरकारी डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं। वे बताते हैं, ‘कराची में अभी करीब 50 मंदिर फंक्शनल हैं यानी उनमें नियमित पूजा होती है। बड़ी तादाद में श्रद्धालु आते हैं।’

‘पूरे पाकिस्तान में करीब 4 हजार छोटे-बड़े हिंदू मंदिर हैं। ये सच है कि इनमें से कई मंदिरों की स्थिति अच्छी नहीं है। अब पाकिस्तान सरकार सभी मंदिरों को रिस्टोर करने और देश-विदेश के हिंदुओं को इनका एक्सेस देने पर काम कर रही है।’

‘पाकिस्तान में हिंदुओं से भेदभाव की खबरें सच नहीं’

कृष्ण शर्मा आगे बताते हैं, ‘पाकिस्तान के बाहर ऐसा नैरेटिव फैला हुआ है कि यहां हिंदुओं के साथ बहुत भेदभाव होता है। ये सच नहीं है।’ हमने उनसे पूछा- ‘पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को अगवा करने, जबरन उनकी शादी करवाने और धर्म बदलवाने की खबरें आती हैं, ये कितनी सच हैं?’

कृष्ण शर्मा जवाब देते हैं, ‘ऐसे वाकये होते हैं, जिनमें हिंदू लड़कियां मुसलमान लड़कों से शादी करती हैं। शादी से पहले उनका धर्म भी बदलवाया जाता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में लड़कियां मर्जी से शादी के लिए मुसलमान लड़के को चुनती है।’

‘अगर लड़की की उम्र 18 साल से कम होती है तो प्रशासन सख्त कदम उठाता है। भारत में भी कोई बालिग लड़की गैर धर्म के लड़के से अपनी मर्जी से शादी करे, तो कानून कुछ नहीं कर सकता। ऐसा ही यहां भी है। फिर भी सरकार की कोशिश है कि इस तरह के मामले कम से कम हों।’

‘हिंदू मंदिर में कभी धमाके नहीं होते’

कृष्ण शर्मा कहते हैं, ‘आप अक्सर पाकिस्तान की मस्जिदों में धमाके की खबरें सुनते होंगे। यहां हिंदू मंदिरों में कभी कोई आतंकी घटना नहीं हुई है। कुछ सोशल मसले हैं, लेकिन ये तो हर जगह होते हैं। हां, जब भारत से खबरें आती हैं कि वहां मुसलमानों के साथ अच्छा सलूक नहीं हो रहा है, तो इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ता है।’

‘पाकिस्तान में करीब 80 लाख हिंदू, सबसे ज्यादा सिंध में’

कृष्ण शर्मा आगे बताते हैं, ‘सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में 52 लाख हिंदू रहते हैं। हालांकि, हमारा डेटा बताता है कि ये आंकड़ा करीब 80 लाख है। पूरे पाकिस्तान में हिंदुओं की सबसे बड़ी आबादी सिंध प्रांत में है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह में भी हैं। कराची हिंदुओं की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। यहां 1.50 लाख से ज्यादा हिंदू रहते हैं।’

पॉलिटिकल लीडर बोले- सरकार अल्पसंख्यकों के लिए काम कर रही

सिंध में अभी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। पार्टी के सीनियर लीडर मखदूम मंसूर हाशमी से हमने हिंदुओं की स्थिति पर बात की। उन्होंने माना कि यहां हिंदू लड़कियों की शादी कर धर्म परिवर्तन कराने के मामले होते हैं।

इसकी वजह बताते हुए मखदूम कहते हैं, ‘यहां पढ़े-लिखे लोग कम हैं। जिस दिन यहां साक्षरता दर 80-90% को पार करेगी, ये समस्या दूर हो जाएगी। सिंध सरकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए काम कर रही है।’

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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एकातेरिना की सूटकेस में मिली नग्न लाश

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 01 मार्च 2025 | जयपुर : जब रूस की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एकातेरिना कराग्लानोवा (Ekaterina Karaglanova) अपने 25वें जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए नीदरलैंड्स जाने वाली थीं। सारी प्लानिंग हो चुकी थी। सब कुछ एकदम परफेक्ट था। अब इंतजार था तो बस बर्थडे सेलिब्रेशन का।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एकातेरिना की सूटकेस में मिली नग्न लाश

सुश्री कराग्लानोवा ने मॉस्को के एक मेडिकल स्कूल में रेजीडेंसी की थी और त्वचाविज्ञान में विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टर के रूप में कार्य किया था। वह एक प्रमुख सोशल मीडिया हस्ती भी थीं, जो नियमित रूप से अपने 85,000 इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के साथ अपनी तस्वीरें साझा करती थीं। 

Ekaterina Karaglanova

लेकिन जब 22 जुलाई से माता-पिता का अपनी बेटी से कोई कॉन्टैक्ट नहीं हुआ, तो वे 27 जुलाई को सीधे उसके अपार्टमेंट पहुंचे। जैसे ही वे घर में दाखिल हुए, तो मंजर दिल दहला देने वाला था। महज तीन फीट के एक लाल सूटकेस में उनकी बेटी की नग्न लाश पड़ी थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी नुकीली चीज से उसे गोदा गया हो।

बेटी को इस हालत में देखकर माता-पिता चीख उठे। शोर-शराबे की आवाज सुनकर पड़ोसी भी आ गए। हैरानी की बात यह थी कि किसी को भी इस घटना की भनक तक नहीं लगी थी, क्योंकि जिस बिल्डिंग में एकातेरिना रहती थीं, वो मास्को की जानी-मानी बिल्डिंग थी, जहां कई सेलिब्रिटी भी रहा करते थे।

खैर, मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को घटना की जानकारी दी। मॉस्को पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। CCTV फुटेज में एकातेरिना के अपार्टमेंट की ओर जाते हुए दो शख्स नजर आए। एक से उसके प्रेम संबंध थे, लेकिन दूसरा कौन था? क्या यह जलन और बदले की वारदात थी या कोई गहरी साजिश? यह मर्डर मिस्ट्री जितनी खौफनाक थी, उतनी ही रहस्यमयी भी।

आज अनसुनी दास्तान : एकातेरिना के वीभत्स हत्याकांड की कहानी

एकातेरिना कराग्लानोवा का जन्म 30 जुलाई 1994 को रूस की राजधानी मॉस्को के इवांका में हुआ था। वह एक डॉक्टर परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता किन यूरोलॉजिस्ट और मां ओल्गा किन्ना एक कार्डियोलॉजिस्ट हैं।

एकातेरिना पढ़ाई में काफी अच्छी थीं। उन्होंने कई लैंग्वेज का कोर्स किया था। इतना ही नहीं वो स्कूल ओलंपियाड में भी अक्सर जीता करती थीं। परिवार में सभी डॉक्टर थे। ऐसे में उनके सामने एक मुश्किल थी कि वह अपनी आगे की पढ़ाई जर्नलिज्म में करें या फिर डॉक्टरी में। हालांकि, उन्होंने परिवार की प्रथा को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टरी को ही चुना।

इसके बाद उन्होंने रशियन नेशनल रिसर्च मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू की। देखने में बेहद खूबसूरत एकातेरिना की दिलचस्पी ग्लैमर वर्ल्ड में होने लगी, जिसके चलते उन्होंने कॉलेज के दूसरे साल में ही मॉडलिंग करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने सेमोचिकिना सरनेम को बदलकर कराग्लानोवा रख लिया, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि मॉडलिंग के लिए सेमोचिकिना सरनेम अच्छा नहीं लगेगा।

एकातेरिना ने कई ब्यूटी कॉन्टेस्ट्स में हिस्सा लिया और 2018 में मिस मैक्सिम का खिताब अपने नाम किया। कम समय में ही उन्होंने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। महज 24 साल में उनके इंस्टाग्राम पर 85 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स थे। उन्हें कई कंपनियों से मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे, जिससे उन्हें खूब शोहरत और दौलत मिली।

पॉपुलैरिटी ऐसी बढ़ी कि लोगों ने उनकी तुलना 50 और 60 के दशक की फेमस ब्रिटिश एक्ट्रेस ऑड्रे हेपबर्न से करना शुरू कर दिया। इसी बीच उन्हें डॉक्टरी की डिग्री भी मिल गई।

एकातेरिना कराग्लानोवा (बाएं) और ब्रिटिश एक्ट्रेस ऑड्रे हेपबर्न (दाएं) की तस्वीर।
एकातेरिना कराग्लानोवा (बाएं) और ब्रिटिश एक्ट्रेस ऑड्रे हेपबर्न (दाएं) की तस्वीर

ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ने के बाद एकातेरिना के कई लोगों से संबंध रहे, लेकिन फिर साल 2019 में उनकी जिंदगी में ऐसे शख्स की एंट्री हुई, जिससे वो प्यार करने लगीं। इसी साल जुलाई में वह 25 साल की होने वाली थीं। उन्होंने नीदरलैंड्स में इस खास दिन का जश्न मनाने का फैसला किया।

इसी बीच खबरें आने लगीं कि उनका एक ऐसे व्यक्ति से संबंध था, जो उम्र में उनसे काफी बड़ा था। एकातेरिना को उससे फाइनेंशियल फायदे मिलते थे। हालांकि, उनकी एक करीबी दोस्त ने इन सभी खबरों को अफवाह बताया और कहा कि उन्हें फाइनेंशियल सपोर्ट की जरूरत नहीं थी।

फोन बंद था परिवार से कोई संपर्क नहीं 

एकातेरिना के माता-पिता के मुताबिक, 22 जुलाई 2019 से एकातेरिना का फोन बंद था। लगभग छह दिनों से उनका परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ था, जिस कारण माता-पिता को उनकी चिंता सताने लगी। चिंतित होकर पेरेंट्स ने एकातेरिना के अपार्टमेंट के मालिक को कॉल किया और कहा कि वे जाकर देखें कि सब कुछ ठीक है या नहीं। फिर वे खुद 27 जुलाई को बेटी के घर पहुंचे।

जैसे ही वे अपार्टमेंट में दाखिल हुए, उन्हें उनकी बेटी तो कहीं नहीं मिली, लेकिन एक बड़ा लाल सूटकेस मिला, जिसे देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उस सूटकेस में एकातेरिना की लाश पड़ी थी। उन्होंने तुरंत एंबुलेंस को कॉल किया। हालांकि, तब तक एकातेरिना की मौत हो चुकी थी।

मॉस्को की यह वही बिल्डिंग है, जिसमें एकातेरिना रहा करती थीं।
मॉस्को की यह वही बिल्डिंग है, जिसमें एकातेरिना रहा करती थीं

एकातेरिना के शरीर पर 19 घाव

पुलिस के मुताबिक, एकातेरिना का शव कमरे के बीचों-बीच सूटकेस में पड़ा हुआ था। उनके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था, केवल बेल्ट और मोजे पहने हुए थे। जब शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, तो रिपोर्ट में सामने आया कि एकातेरिना के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे, लेकिन उनके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई थी।

डॉक्टर की मानें तो एकातेरिना के शरीर पर 19 घाव थे, जो किसी नुकीली ब्लेड या फिर चाकू से किए गए थे। इसमें सबसे ज्यादा वार उनके गर्दन पर हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना को 23 जुलाई की रात को अंजाम दिया गया था।

पड़ोसियों का कहना था कि उस रात उन्होंने अजीब आवाजें सुनीं, लेकिन फिर यह सोचकर नजर अंदाज कर दिया कि शायद उनका कोई दोस्त आया होगा और उनकी बच्ची खेल रही होगी। क्योंकि अक्सर एकातेरिना के घर पर उनके करीबी लोग आते रहते थे।

मामले की जांच में लगी पुलिस ने उस बिल्डिंग को घेर लिया, जहां यह घटना हुई थी। किसी के भी आने-जाने पर रोक लगा दी गई, ताकि सबूतों को इकट्ठा किया जा सके। हालांकि, पुलिस का कहना था कि मौके से कोई जरूरी सुराग नहीं मिले।

कुछ ही दिनों बाद इंटरनेट पर एक तस्वीर वायरल हुई, जिसने न केवल पूरे रूस को दहला दिया, बल्कि पड़ोसी देशों को भी चौंका दिया। यह तस्वीर और किसी की नहीं बल्कि एकातेरिना की डेड बॉडी की थी। उन्हें ऐसी हालत में देखने के बाद जहां एक तरफ उनके फैंस में गुस्सा फैल गया, तो वहीं दूसरी ओर लोगों ने कई तरह की बातें बनानी भी शुरू कर दीं।

कहा जा रहा था कि इस घटना को अंजाम देने के पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा है। इसी वजह से इतनी बेरहमी से मारकर शव को सूटकेस में रखा और उसे कमरे के बीच में छोड़ दिया। जांच के दौरान पुलिस को बिल्डिंग के CCTV कैमरों की फुटेज मिली। फुटेज में एक शख्स को बिल्डिंग में एंट्री लेते और एकातेरिना के अपार्टमेंट की ओर जाते हुए देखा गया। कुछ समय बाद ही वो शख्स एक सूटकेस पकड़े हुए बाहर निकलते हुए भी दिखा।

एकातेरिना के अपार्टमेंट से हाथ में सूटकेस लिए एक शख्स बाहर निकलता हुआ।

एकातेरिना के अपार्टमेंट से हाथ में सूटकेस लिए एक शख्स बाहर निकलता हुआ।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शख्स की पहचान मैक्सिम गैरेथ के रूप में हुई, जिसकी उम्र 33 साल थी। वह भी मॉस्को में रहता था और फुटबॉल कोच था। हालांकि, जब दोबारा सभी फुटेज को ध्यान से देखा गया तो एक और आदमी बिल्डिंग में दाखिल हुआ और वो भी एकातेरिना के अपार्टमेंट में ही जा रहा था।

इस आदमी की पहचान बाद में की गई और पुलिस ने उसे ढूंढ निकाला, लेकिन उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। ये जानकारी भी सामने आई थी कि वो एकातेरिना के साथ रिश्ते में था और उसकी उम्र 52 साल थी। दोनों का जन्मदिन साथ में मनाने का प्लान था।

हालांकि, CCTV में सूटकेस हाथ में लिए हुए सिर्फ मैक्सिम गैरेथ ही दिखाई दिया था, जो घटना के दो दिन बाद उस जगह पर वापस भी आया था। ऐसे में पुलिस का शक अब यकीन में बदल चुका था कि यह वही व्यक्ति था, जिसने एकातेरिना का कत्ल किया होगा। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी।

इसी दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि एकातेरिना को उनकी न्यूड तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जा रहा था। उन्होंने इस बारे में कुछ दोस्तों से बात की थी, लेकिन कभी भी पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराने नहीं गईं।

एक दोस्त ने पुलिस को बताया कि एकातेरिना अपनी सुरक्षा को लेकर काफी डरी हुई थीं। उसने बताया था कि कोई उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उनकी दोस्त ने सोचा कि वो एक स्टार हैं, ऐसे में कोई उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा होगा। इसके बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच शुरू कर दी थी, क्योंकि एकातेरिना के पास डॉक्टरी की डिग्री थी। साथ ही वह सोशल नेटवर्क्स से भी अच्छा खासा पैसा कमाती थी।

डेटिंग साइट्स पर कई नामों से मिली प्रोफाइल

जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे कई राज भी उजागर हो रहे थे। जब पुलिस ने एकातेरिना का फोन और कंप्यूटर चेक किया, तो उन्हें डेटिंग साइट्स पर एकातेरिना की अलग-अलग नामों से कई प्रोफाइल मिलीं।

अपनी प्रोफाइल में एकातेरिना ने लिखा था कि उसे उम्रदराज और सफल पुरुष पसंद हैं। इसके बाद पुलिस को समझ आया कि वह उम्रदराज पुरुषों के साथ आर्थिक लाभ के बदले संबंध बनाती थीं। इसके कुछ समय बाद पुलिस को उनकी प्रोफाइल्स एस्कॉर्ट वेबसाइट्स पर भी मिली, जिसके बायो में उन्होंने लिखा था कि वह पुरुषों की मांग पूरी करने वाली महिला थीं। जब पुलिस ने एकातेरिना के माता-पिता से इस बारे में पूछा तो वे शॉक्ड हो गए।

माता-पिता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी थी। ऐसे में वे नहीं सोच सकते थे कि उनकी बेटी ऐसा कुछ कर सकती थी। अब पुलिस को यह समझ आने लगा कि कहीं न कहीं उनका कोई क्लाइंट अपराधी हो सकता है।

मैक्सिम गैरेथ ने कबूला- मैंने ही की हत्या

इसी बीच मैक्सिम गैरेथ खुद पुलिस के पास पहुंचा और कबूल कर लिया कि उसने ही एकातेरिना की हत्या की है। उसने बताया कि वह एकातेरिना से एस्कॉर्ट वेबसाइट के जरिए मिला था। इसके बाद वह उसके अपार्टमेंट में पहुंचा और शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन फिर एकातेरिना ने उसकी खूब बेज्जती की।

एकातेरिना ने कहा था कि वह (मैक्सिम) बदसूरत है और प्लास्टिक सर्जरी से भी उसे कोई फायदा नहीं होगा। इतना ही नहीं शारीरिक संबंध भी ठीक से नहीं बना पाया। ये बातें मैक्सिम की बर्दाश्त से बाहर हो गईं और आपा खोते हुए उसने रसोई से चाकू लिया और उन पर हमला कर दिया। सीने और गर्दन पर चाकू से कम से कम पांच बार वार किया।

अपराध को अंजाम देने के बाद उसने पूरे कमरे की सफाई की और सूटकेस में लाश को कमरे के बीचों-बीच रख दिया। उसने बताया कि पहले प्लान था कि शव को बाहर ले जाकर उसे नष्ट कर देगा, लेकिन किसी कारण ऐसा नहीं हो पाया। CCTV में जो सूटकेस उसके हाथों में दिखाई दिया था उसमें एकातेरिना के खून से लथपथ कपड़े भरे हुए थे।

उसने बताया कि जब वो दो दिन बाद वापस आया था तो वह लाश को बाहर ले जाना चाहता था। लेकिन उससे पहले ही पुलिस को उसके बारे में पता चल गया था। ऐसे में वो बिना सबूत मिटाए वहां से चला गया।

यह तस्वीर मैक्सिम गैरेथ की है, जिसने एकातेरिना का कत्ल किया था।

यह तस्वीर मैक्सिम गैरेथ की है, जिसने एकातेरिना का कत्ल किया था।

हत्या के बाद कातिल ने की आत्महत्या की कोशिश

मैक्सिम ने कहा कि उसने एकातेरिना की हत्या की, जिसके लिए वह काफी शर्मिंदा है। हालांकि, वह जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने जेल में अपनी जान लेने की भी कोशिश की थी। ऐसे में जेल प्रशासन ने उसके साथ कई लोगों को रखा, ताकि वह भविष्य में कोई ऐसा कदम न उठाए।

मैक्सिम का मुकदमा मॉस्को कोर्ट में चला। उसने एकातेरिना के माता-पिता से माफी भी मांगी, यह कहते हुए कि अगर वह समय को पीछे मोड़ सकता, तो वह अपने किए हुए को बदल देता। मॉस्को कोर्ट ने मैक्सिम को दोषी पाया और उसे नौ साल की सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता के परिवार को 21 लाख रुपए का मुआवजा भी अदा करने का आदेश दिया।

एकातेरिना के माता-पिता कोर्ट के फैसले के खिलाफ थे। उनका कहना था कि वे इस सजा के खिलाफ अपील करेंगे, क्योंकि उन्हें यह सजा उस अत्याचार के मुकाबले बहुत ही कम लगी जो मैक्सिम ने उनकी बेटी के साथ किया था।

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