लक्ष्य सेन पेरिस ओलिंपिक के बैडमिंटन, भारत को मेडल दिलाने की इकलौती उम्मीद

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 04 अगस्त 2024 |  जयपुर : लक्ष्य सेन पेरिस ओलिंपिक के बैडमिंटन में भारत को मेडल दिलाने की इकलौती उम्मीद हैं। 22 साल के युवा शटलर ने मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। आज जीतते ही वह ओलिंपिक इतिहास में भारत को मेंस कैटेगरी का पहला बैडमिंटन मेडल दिला देंगे।

लक्ष्य सेन पेरिस ओलिंपिक के बैडमिंटन,भारत को मेडल दिलाने की इकलौती उम्मीद

लक्ष्य अपना पहला ही ओलिंपिक खेल रहे हैं। उनका सेमीफाइनल दोपहर 12 बजे से डेनमार्क के विक्टर एक्सलसेन के खिलाफ होगा। लक्ष्य का जन्म उत्तराखंड के अलमोड़ा में हुआ, उनके भाई, पिता और दादा भी बैडमिंटन प्लेयर ही रहे।

लक्ष्य सेन पेरिस ओलिंपिक के बैडमिंटन

लक्ष्य 5 साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं और बड़ों के खिलाफ हारने पर दुखी होकर रोने लग जाते थे। वह अब देश को ओलिंपिक मेडल दिला सकते हैं। 

पिता और दादा भी बैडमिंटन प्लेयर

16 अगस्त, 2001। उत्तराखंड के अलमोड़ा में बैडमिंटन प्लेयर डीके सेन के घर लक्ष्य का जन्म हुआ। लक्ष्य के परिवार में बैडमिंटन की जड़ें आजादी से भी पहले की है। उनके दादा चंद्र लाल सेन दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी रहे। जिस कारण डीके ने भी बैडमिंटन खेला और उनके दोनों बेटों चिराग और लक्ष्य ने भी बचपन से ही बैडमिंटन को करियर बना लिया।

5 साल की उम्र में पहुंचे बैडमिंटन कोर्ट

खेलप्रेमी परिवार से होने के चलते 5 साल की उम्र में ही लक्ष्य अपने दादाजी के साथ अलमोड़ा के बैडमिंटन कोर्ट पहुंच गए। शहर में कोर्ट भी लक्ष्य के दादाजी ने ही बनवाया था, लेकिन कम सुविधाएं होने के कारण डीके सेन वहां से इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच सके।

पिता और दादा के स्ट्रगल ने लक्ष्य का रास्ता आसान किया। स्कूल शुरू होते ही उन्होंने अपने बड़े भाई चिराग के साथ रेगुलर बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। लक्ष्य सेन 5 साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं।

लक्ष्य सेन 5 साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं।

बेटे को ट्रैडिशनल बैडमिंटन नहीं सिखाई

डीके सेन प्रोफेशनल बैडमिंटन कोच हैं। उन्होंने अपने बैटों को ट्रैडिशनल ट्रेनिंग नहीं दी, जिसमें सर्विस सिखाने से ट्रेनिंग शुरू होती है। डीके ने अपने बेटों के साथ नॉर्मल बैडमिंटन खेलना शुरू किया, जैसे गलियों में भारत के बच्चे खेला करते हैं। ऐसा उन्होंने इसलिए किया, ताकि लक्ष्य की बैडमिंटन पर पकड़ बन सके।

डीके का मानना है कि ऐसा करने से लक्ष्य मेंटली मजबूत हुआ। लक्ष्य को इस दौरान उन्होंने छोटी-छोटी बैडमिंटन ड्रिल्स भी कराई। जिससे लक्ष्य पूरे कोर्ट को तेजी से कवर करना सीखे। बैडमिंटन में यह ड्रिल्स सबसे जरूरी हैं, लेकिन यह तभी की जाती है, जब प्लेयर को स्ट्रोक्स खेलने की आदत होती है। जबकि लक्ष्य ने पहले दिन से ही इन ड्रिल्स की आदत डाल ली थी।

डीके का कहना सिंपल है, ‘बैडमिंटन में स्ट्रोक खेलने के लिए आपको शटल के पीछे पहुंचना ही होगा। अगर शटल आपके शरीर के पीछे रह गई तो आप शॉट कैसे खेलोगे? युवा प्लेयर्स के लिए जरूरी है कि वह रनिंग बहुत करें। स्प्रिंटिंग भी जरूरी है, क्योंकि आपको कोर्ट पर स्पीड चाहिए होती है।’ 

डिफेंड करने की भी इंटेंस प्रैक्टिस कराई

शुरुआत में ही डीके ने दोनों भाइयों के डिफेंड करने की स्किल पर भी काम किया। सीनियर प्लेयर्स के साथ दोनों के मैच कराए, ताकि वह स्मैश से डरे नहीं और उन्हें आसानी से डिफेंड कर सके। उनकी कोचिंग स्किल की आलोचना भी हुई, लेकिन आज इन्हीं स्किल्स से लक्ष्य को सफलता मिल रही है।

डीके बताते हैं, ‘लक्ष्य को ​​​​​​अपनी उम्र से ​बड़े प्लेयर्स के साथ खेलने की आदत लग गई। वह अपने स्कूल में भी बड़ों की टीम का हिस्सा बनता। यहां तक कि बड़े बच्चों के कल्चरल प्रोग्राम में भी लक्ष्य आगे होकर हिस्सा लेते थे। टीचर उसे मना करते, लेकिन वह जिद करता और किसी तरह पार्टिसिपेट कर ही लेता था।’

पिता ने दोनों भाइयों को भेजा बेंगलुरु

उत्तराखंड में ज्यादा इम्प्रूवमेंट नहीं मिलते देख पिता ने 7 साल के लक्ष्य को चिराग के साथ बेंगलुरु भेजा। जहां प्रकाश पादुकोण एकेडमी में लक्ष्य अपनी बैडमिंटन स्किल्स को नई ऊंचाइयों पर ले गए। हालांकि, दादा अपने पोते लक्ष्य को सफल होते नहीं देख सके, 2013 में उनका निधन हो गया। लेकिन दादा अपने पोते में बैडमिंटन की आग जला चुके थे। पिता डीके सेन (बाएं) और प्रकाश पादुकोण (दाएं) के साथ लक्ष्य।

पिता डीके सेन (बाएं) और प्रकाश पादुकोण (दाएं) के साथ लक्ष्य।

मां बोलीं, हारने पर रोता था लक्ष्य

लक्ष्य की मां निर्मला ने एक इंटरव्यू में कहा है, ‘लक्ष्य को छोटी उम्र में बड़ी उम्र के लड़के हरा देते थे। वह हार से दुखी होकर रोता रहता था, लेकिन फिर भी बैडमिंटन खेलता। हारना उसे कभी पसंद नहीं था, उसमें हमेशा से जीतने की जिद थी।’ उनकी मां बताती हैं कि दोनों भाई पढ़ाई में भी तेज हैं। इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स के बीच भी लक्ष्य उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर रहा है।

सुबह 4:30 बजे ट्रेनिंग करते थे लक्ष्य

पिता कहते हैं, ‘लक्ष्य की ट्रेनिंग सुबह 4:30 बजे से शुरू हो जाती थी। दोनों 2 किमी दौड़ते और 200 मीटर स्प्रिंट भी करते। मैं उसे हमेशा चैलेंज करता था ताकि वह तेज भागे, लेकिन मैं जानबूझकर उससे हार भी जाता था। वह बहुत जिद्दी है और जीतने के लिए बहुत मेहनत करता है।’ इसी जिद से 2014 में लक्ष्य ने स्विज जूनियर इंटरनेशनल के रूप में अपना पहला जूनियर खिताब जीता।

अलमोड़ा में अपने माता-पिता और भाई चिराग के साथ लक्ष्य सेन (दाएं)।

2016 में जीती पहली सीनियर चैंपियनशिप

2016 तक लक्ष्य ने कई जूनियर चैंपियनशिप अपने नाम की। एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतना जूनियर लेवल पर उनकी बेस्ट परफॉर्मेंस रही। 2016 में ही उन्होंने सीनियर चैंपियनशिप खेलना शुरू कर दी और इसी साल इंडिया इंटरनेशनल सीरीज के रूप में अपना पहला सीनियर टूर्नामेंट जीता। अलमोड़ा में अपने माता-पिता और भाई चिराग के साथ लक्ष्य सेन (दाएं)।

लक्ष्य सेन ओलिंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने हैं।

यूथ ओलिंपिक में गोल्ड जीतकर बनाई पहचान

2018 में लक्ष्य ने यूथ ओलिंपिक्स का गोल्ड जीता और यहीं से बैडमिंटन जगत में उनकी नई पहचान बन गई। वह 2022 में थॉमस कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा भी रहे। 2022 के ही कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड जीता। कॉमनवेल्थ के ही टीम इवेंट में उन्होंने सिल्वर भी अपने नाम किया।

लक्ष्य ने BWF वर्ल्ड टूर के 4 और इंटरनेशनल सीरीज के 7 खिताब जीते हैं। 2022 में 20 साल की उम्र में ही उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। लक्ष्य अब अपने डेब्यू ओलिंपिक में ही मेडल जीतकर इतिहास रच सकते हैं। लक्ष्य सेन ओलिंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने हैं।

पेरिस में शुरुआती 4 मैच 2-2 गेम में ही जीते

पेरिस ओलिंपिक से पहले लक्ष्य ने BWF के ज्यादातर टूर्नामेंट खेले। इंडोनेशिया ओपन के रूप में उन्होंने आखिरी टूर्नामेंट खेला, जिसमें वह क्वार्टर फाइनल हार गए। वह एकेडमी पहुंचे और पेरिस ओलिंपिक की तैयारी में जुट गए। पेरिस में उन्होंने ग्रुप स्टेज में तीनों मैच 2 ही गेम में जीत लिए।

प्री क्वार्टर फाइनल भी 2 गेम में जीता, फिर क्वार्टर फाइनल 3 गेम में जीतकर सेमीफाइनल में भी जगह बना ली। अगर लक्ष्य आज का मैच जीतने में कामयाब रहते हैं तो 2024 में यह उनका पहला ही फाइनल होगा। साथ ही यह ओलिंपिक के बैडमिंटन इतिहास में भारत का पहला ही मेंस कैटेगरी का मेडल भी होगा।

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RCA की बर्बादी के लिए कौन है जिम्मेदार, राजस्थान के क्रिकेटर्स का भविष्य चौपट

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 26 मार्च 2025 | जयपुर :  राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी पर शिकंजा कसता जा रहा है। एडहॉक कमेटी को अब राज्य सरकार ने नोटिस जारी कर पिछले एक साल में हुए खर्चों का ब्योरा मांगा है। आरोप है कि कमेटी पदाधिकारी अपने निजी खर्चों के लिए पैसों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

RCA की बर्बादी के लिए कौन है जिम्मेदार

खेल विभाग के सचिव नीरज कुमार पवन ने बताया- वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। इसलिए पूरे मामले की जांच करने का फैसला किया गया है। खर्चों की पूरी जानकारी मांगी गई है। वहीं नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।

RCA की बर्बादी के लिए कौन है जिम्मेदार

वर्तमान की एडहॉक कमेटी का गठन एक साल पहले किया गया था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि RCA कि बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है और राजस्थान के होनहार खिलाडियों का करियर कौन बर्बाद कर रहा है?

“RCA की बर्बादी” से आपका तात्पर्य संभवतः राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) से है। इस सवाल का जवाब देना जटिल है क्योंकि इसके लिए कोई एक व्यक्ति या समूह को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार ठहराना संभव नहीं है बिना ठोस तथ्यों और संदर्भ के। यह एक राय-आधारित प्रश्न है जो राजनीतिक, प्रशासनिक और संगठनात्मक कारकों पर निर्भर करता है।

हाल के घटनाक्रमों के आधार पर, जैसे कि फरवरी 2024 में राज्य खेल परिषद द्वारा RCA के दफ्तर पर ताला लगाने की घटना, कुछ लोग इसे राजनीतिक द्वेष से जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया था, क्योंकि उनके बेटे वैभव गहलोत RCA के अध्यक्ष हैं। दूसरी ओर, यह भी संभव है कि संगठन के आंतरिक प्रबंधन, वित्तीय अनियमितताओं या नीतिगत विवादों ने इसके संकट में योगदान दिया हो।

एडहॉक कमेटी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

आईपीएल शुरू होने से ठीक पहले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की एडहॉक कमेटी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। कमेटी के सदस्यों पर आरसीए के फंड का दुरुपयोग करने, खुद के लिए महंगे आईफोन खरीदने और अनावश्यक रूप से महंगे समारोह आयोजित करने के आरोप हैं।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की बर्बादी के लिए कौन है जिम्मेदार

कमेटी के सदस्यों ने कथित रूप से आरसीए के पैसों से 2 लाख रुपये के महंगे आईफोन खरीदे। इसके अलावा, उन्होंने फंड का उपयोग कर महंगे सूट भी सिलवाए। आरसीए के पास खुद का लक्जरी होटल होने के बावजूद बाहरी महंगे होटलों में समारोह आयोजित किए गए, जिससे अनावश्यक खर्च बढ़ा। एक समारोह में 35 लाख रुपये खर्च करने की जानकारी सामने आई है, जबकि पुरस्कार राशि केवल 5 लाख रुपये थी।

सदस्यों पर फर्जी टीए-डीए लेने का भी आरोप है। नियमों के अनुसार, एडहॉक कमेटी का काम केवल तीन माह में चुनाव कराना होता है, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए। साथ ही, राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को कार्यक्रमों में निमंत्रण नहीं भेजा गया और साधारण सभा की बैठक भी नहीं बुलाई गई, जो कि वित्तीय मामलों को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक होती है।

राजस्थान के क्रिकेटर्स का भविष्य चौपट

पहले भी खिलाड़ियों के चयन को लेकर एडहॉक कमेटी पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। अब इन नए आरोपों ने राजस्थान के क्रिकेट समुदाय में आक्रोश फैला दिया है। क्रिकेट प्रेमियों और खिलाड़ियों ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि आरसीए के फंड का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि राजस्थान में क्रिकेट का विकास हो सके।

राजस्थान के क्रिकेटर्स का भविष्य “चौपट” होने की बात एक गंभीर चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन इसे समझने के लिए हमें कई पहलुओं पर नजर डालनी होगी। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के हाल के विवादों और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों ने निश्चित रूप से राज्य के क्रिकेट पर असर डाला है।

पिछले कुछ वर्षों में RCA में आंतरिक कलह, नेतृत्व के झगड़े और प्रशासनिक अस्थिरता की खबरें सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, 2013 में ललित मोदी और उनके विरोधियों के बीच टकराव ने संगठन को दो खेमों में बांट दिया था, जिसका असर खिलाड़ियों के चयन और विकास पर पड़ा।

हाल ही में, फरवरी 2024 में राज्य खेल परिषद द्वारा RCA दफ्तर पर ताला लगाने की घटना ने भी सुर्खियां बटोरीं, जिसे राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा गया। ये विवाद युवा क्रिकेटर्स के लिए अनिश्चितता पैदा करते हैं, क्योंकि संगठन की अस्थिरता सीधे तौर पर ट्रेनिंग, कोचिंग और टूर्नामेंट्स की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

इसके अलावा, संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं, कोचिंग और एक्सपोजर नहीं मिल पाता। X पर कुछ यूजर्स ने भी इस ओर इशारा किया है कि स्कूलों में भेजी गई खेल सामग्री की गुणवत्ता घटिया है, जिससे बुनियादी स्तर पर खिलाड़ियों का विकास बाधित हो रहा है। साथ ही, चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर जातिवाद और पक्षपात की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जो प्रतिभा को मौका देने के बजाय उसे दबा सकती हैं।

हालांकि, यह कहना कि भविष्य पूरी तरह “चौपट” है, शायद अतिशयोक्ति हो। राजस्थान ने अजिंक्य रहाणे, दीपक हुड्डा और राहुल चाहर जैसे खिलाड़ी दिए हैं, जो राष्ट्रीय और IPL स्तर पर चमके। राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन RCA को स्थिरता, पारदर्शिता और बेहतर नीतियों की जरूरत है। अगर प्रशासन सुधरे, कोचिंग सिस्टम मजबूत हो और युवाओं को सही मंच मिले, तो राजस्थान के क्रिकेटर्स का भविष्य फिर से उज्ज्वल हो सकता है।

3 महीने में होने चाहिए चुनाव

नीरज कुमार पवन ने कहा- हम यही कोशिश करेंगे कि जो भी सदस्य अब एडहॉक कमेटी में आए। वह अगले तीन महीने में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के लंबित चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करे। ताकि क्रिकेट की जो गतिविधियां है। वह सही ढंग और सुचारू रूप से संचालित की जा सकें।

राजस्थान क्रीड़ा परिषद ने जारी किया नोटिस।

लाखों रुपए गलत तरीके से खर्च करने के आरोप

दरअसल, पिछले दिनों राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी पर खिलाड़ियों के अवॉर्ड फंक्शन के नाम पर लाखों रुपए गलत ढंग से खर्च करने के आरोप लगे थे। राजस्थान क्रीड़ा परिषद ने जारी किया नोटिस।

इसको लेकर काफी जिला संघों के पदाधिकारियों ने खेल मंत्री और खेल विभाग के सचिव तक भी शिकायत की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि खिलाड़ियों के पैसे से एडहॉक कमेटी के पदाधिकारी महंगे मोबाइल फोन खरीदने के साथ ही सूट स्टिच करवा रहे हैं।

इसके साथ ही बेवजह लाखों रुपए खर्च कर फाइव स्टार होटल में प्रोग्राम किया जा रहा है। इसके लिए गलत ढंग से एक इवेंट कंपनी को साढ़े सात लाख रुपए में ठेका भी दिया गया है। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राजस्थान के खेल संघ की वित्तीय ऑडिट करने के आदेश दिए थे।

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राजस्थान के खेल संघ की वित्तीय ऑडिट करने के आदेश दिए थे।

खेल मंत्री ने किया था ट्वीट

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ट्वीट कर कहा था कि खेल परिषद को राज्य के सभी खेल निकायों, जिनमें क्रिकेट भी शामिल हैं। ऐसे सभी खेल संघों के लिए एक उच्च स्तरीय शासन प्रणाली लागू करनी चाहिए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा अपनाई गई नीतियों की तरह राजस्थान में भी खेल संगठनों का संचालन किया जाना चाहिए।

28 मार्च को एडहॉक कमेटी का गठन किया था

राजस्थान सरकार ने आरसीए की कार्यकारिणी को भंग कर सरकार ने 28 मार्च 2024 को एडहॉक कमेटी का गठन किया था। इसे 3 महीने में आरसीए के चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।

लगभग एक साल बाद भी सरकार की ओर से गठित की गई एडहॉक कमेटी आरसीए के चुनाव नहीं करा पाई है। कमेटी में बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी कन्वीनर और धनंजय खींवसर, धर्मवीर सिंह शेखावत, रतन सिंह शेखावत, हरीशचंद्र सिंह और विमल शर्मा ही सदस्य हैं।

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राहुल द्रविड़ व्हीलचेयर पर बैठकर राजस्थानी अंदाज में गुलाबी साफा पहन खेली होली

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 14 मार्च 2025 | जयपुर : राजस्थान रॉयल्स टीम के खिलाड़ियों और कोच ने जयपुर में होली खेली। प्रैक्टिस कैंप में पहुंचे रॉयल्स के खिलाड़ियों ने मैरियट होटल के गार्डन एरिया में जमकर होली का जश्न मनाया। इस दौरान टीम के चीफ कोच राहुल द्रविड़ व्हीलचेयर पर बैठकर राजस्थानी अंदाज में गुलाबी साफा पहन होली खेलने पहुंचे।

राहुल द्रविड़ व्हीलचेयर पर बैठकर राजस्थानी अंदाज में गुलाबी साफा पहन खेली होली

राहुल द्रविड़ व्हीलचेयर पर बैठकर राजस्थानी अंदाज में गुलाबी साफा पहन खेली होली

इस दौरान सभी खिलाड़ियों ने राजस्थान रॉयल्स के चीफ कोच और मैनेजमेंट के सदस्यों के साथ ग्रुप फोटो भी क्लिक करवाई। खिलाड़ियों ने एक दूसरे को गुलाल और पानी से रंग दिया।

आईपीएल के पिछले सीजन में शानदार बैटिंग करने वाले रियान पराग धुलंडी के मौके पर एक अलग ही रंग में नजर आए। उन्होंने सबसे पहले खुद को ही गुलाबी रंग लगाया और होली की शुभकामनाएं दी। इसके बाद वह अपने साथी खिलाड़ियों के साथ जमकर डांस और मस्ती करते नजर आए।

खिलाड़ियों ने एक दूसरे को गुलाल और पानी से रंग दिया।

सभी खिलाड़ियों ने साथ में फोटो खिंचवाई

होली का जश्न मनाने के दौरान राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज रियान पराग और ध्रुव जुरैल सबसे ज्यादा मस्ती करते नजर आए। दोनों खिलाड़ियों ने टीम के अन्य सदस्यों पर जमकर गुलाल उड़ाया। दोनों ने साथी खिलाड़ियों के साथ बॉलीवुड गानों पर जमकर डांस किया। 

देखिए, खिलाड़ियों की होली की मस्ती की तस्वीरें…

रियान पराग ने खुद को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।

रियान पराग ने खुद को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।

राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों ने गुलाल से होली का जश्न मनाया।

राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों ने गुलाल से होली का जश्न मनाया।

राजस्थान के खिलाड़ियों ने मैरियट होटल के गार्डन एरिया में जमकर मस्ती की।

राजस्थान के खिलाड़ियों ने मैरियट होटल के गार्डन एरिया में जमकर मस्ती की।

खिलाड़ी रंग लगाने के साथ एक दूसरे के कपड़े फाड़ते नजर आए।

खिलाड़ी रंग लगाने के साथ एक दूसरे के कपड़े फाड़ते नजर आए।

राहुल द्रविड़ ने व्हीलचेयर पर बैठकर ही खिलाड़ियों के साथ होली खेली।

राहुल द्रविड़ ने व्हीलचेयर पर बैठकर ही खिलाड़ियों के साथ होली खेली।

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