सैल्यूट डॉ प्रिया गर्ग सीनियर डीएमओ रेलवे हॉस्पिटल अजमेर

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 20 जुलाई 2024 | दिल्ली : दिल्ली एयरपोर्ट पर एक बुजुर्ग व्यक्ति को 14 जुलाई को अचानक हार्ट अटैक आ गया था। वे गिरकर बेहोश हो गए थे। वहां मौजूद एक महिला डॉक्टर ने तुरंत सीपीआर देकर उनकी जान बचाई। ये महिला डॉक्टर जयपुर की रहने वाली डॉ. प्रिया गर्ग हैं।

सैल्यूट डॉ प्रिया गर्ग सीनियर डीएमओ रेलवे हॉस्पिटल अजमेर

अजमेर के रेलवे हॉस्पिटल में सीनियर डीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। करीब 12 साल से अजमेर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉ. प्रिया गर्ग पति रमाकांत गोयल के साथ। दिल्ली एयरपोर्ट उनके पति भी साथ थे।

सैल्यूट डॉ. प्रिया गर्ग सीनियर डीएमओ रेलवे हॉस्पिटल अजमेर

जवाब- एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट डॉ. प्रिया ने बताया 17 जुलाई को वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था। एयरपोर्ट पर किसी पैसेंजर ने बनाकर अपलोड किया होगा। लोगों का रिस्पेक्ट देखकर अच्छा लग रहा है। मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी। कई बार रिजल्ट बेहतर नहीं आने पर लोग डॉक्टर के खिलाफ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं है।

कई बार डॉक्टर के काफी प्रयास के बावजूद भी सफलता नहीं मिलती है। उस हालात में मरीज के परिवार के साथ ही डॉक्टर को भी काफी दुख होता है। डॉक्टर अपने मरीज का कभी बुरा नहीं चाहेगा। मेरा यही अनुरोध है कि किसी भी डॉक्टर पर हाथ उठाने से पहले या हिंसा करने से पहले इस चीज को हमेशा सोचें।

जवाब- डॉ. ने बताया कि वह अपने पति रमाकांत गोयल (रेडियोलॉजिस्ट) के साथ अमरनाथ यात्रा से लौट रही थीं। श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से जयपुर कनेक्टिंग फ्लाइट थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर रविवार को पहुंचे थे।

फ्लाइट ढाई घंटे लेट होने पर टर्मिनल- 2 पर इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट के फूड कोर्ट एरिया में रिफ्रेशमेंट ले रहे थे। पास के स्टॉल पर बुजुर्ग अंकल थे। वे अचानक बेहोश हो गए। मैं दौड़ते हुए उनके पास गई। एक अन्य डॉक्टर दंपती भी वहां मौजूद थे। हम आपस में किसी को नहीं जानते थे।

अंकल को चेक किया तो उनकी पल्स नहीं आ रही थी और सांस लेना भी बंद कर दिया था। उनका शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया था। उन्हें तुरंत सीपीआर देना शुरू किया गया। करीब 5 मिनट सीपीआर देने के बाद उन्होंने रिस्पॉन्स किया था। कुछ देर बाद अंकल की पल्स वापस आ गई। फिर भी सीपीआर देना चालू रखा।

एयरपोर्ट फैकल्टी ने भी मशीनों से चेक किया। पल्स वगैरह स्टेबल हो गई थी। डॉ. प्रिया ने बताया कि अंकल के पॉकेट से मोबाइल निकालकर स्क्रीन लॉक खुलवाया गया। उनकी वाइफ एयरपोर्ट पर ही थी। फोन के बाद वे स्टॉल के पास पहुंचीं। इसके बाद हॉस्पिटल ले जाया गया था।

सवाल- बुजुर्ग कहां के थे और अब उनकी स्थिति क्या है?

जवाब- डॉ. प्रिया ने बताया कि एयरपोर्ट पर अंकल का नंबर लिया था। बाकी ऐसे हालात नहीं थे कि ज्यादा बात हो पाती। एयरपोर्ट फैकल्टी के आने के बाद हम भी लौट आए थे। वापस आकर फोन जरूर किया था। तब उनके बेटे से बात हुई। उन्होंने बताया कि वे ठीक है और कार्डियक बाइपास सर्जरी हुई है। इसके अलावा उनके बारे में जानकारी नहीं है।

सवाल- अगर आप वहां नहीं होते तो क्या हो सकता था?

जवाब- अगर मैं नहीं होती तो कोई और होता.. क्योंकि जिसे ईश्वर को बचाना है, उसके लिए कोई न कोई रास्ता ढूंढ ही लेता है। मेरे होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा यही कहना है कि जो भी इस तरह के घटनाक्रम पर मौजूद रहे, वह तुरंत एक्शन ले। जिस तरीके का पॉजिटिव माहौल अभी बना है।

उससे शायद काफी लोगों को प्रेरणा मिलेगी। हमारे यहां नेगेटिव चीज ज्यादा और पॉजिटिव चीज कम वायरल होती है। यह चीज इतनी वायरल हुई कि शायद लोगों को पॉजिटिव मैसेज मिलेगा। इसके लिए मैं सभी लोगों का दिल से शुक्रिया करती हूं।

सवाल- कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) के मामले बढ़ रहे हैं, युवाओं में भी लगातार केस बढ़ने लगे हैं, कारण क्या है?

जवाब- कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक ही बात है। हार्ट को ही मेडिकल लैंग्वेज में कार्डियक बुलाया जाता है। युवाओं में बढ़ने का कारण दिनचर्या में बदलाव आना है। खान-पान में भी परिवर्तन हो गया है। पहले लोग पैदल चलते थे और अब सभी काम मशीनरी हो गए हैं। आजकल थोड़ी भी दूर जाना हो तो गाड़ी पर जाते हैं। बीपी, शुगर, मोटापा का कारण भी दिनचर्या में बदलाव आना है।

सवाल- सीपीआर के बारे में अभी भी कई लोग नहीं जानते, क्या है ये ?

जवाब- मरीज की हृदय गति बिल्कुल रुक जाती है और ब्लड का सर्कुलेशन थम जाता है। उस समय सीपीआर दिया जाना बहुत जरूरी होता है। हृदय गति रुकने से मरीज के अंगों को ऑक्सीजन और खून का पहुंचना बंद हो जाता है। ब्रेन को ऑक्सीजन और खून का पहुंचना कम हो जाता है। जब तक मरीज को हॉस्पिटल ले जाया जाता है, विंडो पीरियड निकल जाता है। उस समय सीपीआर देना स्टार्ट कर देना चाहिए। इससे मरीज के बचने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

डॉ. प्रिया ने बताया- सीपीआर दो तरीके के होते हैं। इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट होता है और दूसरा एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट होता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट जो होता है वह सामान्य तरीके से करते हैं, जिसमें किसी तरह के उपकरण की जरूरत नहीं होती है। 

मैंने जो किया, वह हैंड जोनली सीपीआर था, जिसमें सिर्फ हमें अपने हाथों का उपयोग करना होता है, जिसमें मरीज को पीठ के बल लेटाया जाता है। मरीज के लेफ्ट साइड में घुटने के बल बैठकर मरीज के सांस के रास्ते में रुकावट न हो उसे चेक करते हैं।

वह सिर्फ हमारे हाथों से किया जाता है। मरीज की छाती पर हथेलियों से दबाव बनाया जाता है। हमारी कोहनी इस दौरान मुड़नी नहीं चाहिए। इससे प्रेशर सीधा हार्ट की तरफ जा सकेगा।

पति भी डॉक्टर

डॉ. प्रिया गर्ग जयपुर की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई एसएमएस मेडिकल कॉलेज (जयपुर) से हुई है। डॉ. प्रिया ने बताया कि 12 साल से अजमेर में रह रही है। पति भी एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने X पर किया ट्वीट
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने X अकाउंट पर भी ट्वीट किया है। देवनानी ने लिखा- अजमेर रेलवे हॉस्पिटल में सीनियर डीएमओ जयपुर निवासी डॉक्टर प्रिया ने दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी सूझबूझ से सीपीआर देकर बुजुर्ग की जान बचाई। बुजुर्ग को हार्ट अटैक आया था।

उनकी यह सूझबूझ और साहसिक काम हम सभी को जागरूक करने वाला है। हार्ट अटैक आने के 5-6 मिनट के भीतर सीपीआर देने से व्यक्ति की जान बच सकती है और समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।

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अरावली प्रदेश की जोर पकड़ती माँग और “अरावली प्रदेश” के लाभ

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 26 मार्च 2025 | जयपुर : प्रोफेसर मीना पूर्वी राजस्थान के लिए “अरावली प्रदेश” की स्थापना की वकालत करते हैं। उनकी रणनीति में क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करना और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर बहुजन समुदाय के आर्थिक-सामाजिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है।

भारत की पारिस्थितिकी, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिए जीवन रेखा के रूप में काम करती रही है। हालाँकि, अवैध खनन, शहरीकरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण अरावली काफ़ी हद तक क्षरण का सामना कर रही है।

इन दबावों के कारण इस पर्वत श्रृंखला के बड़े हिस्से का क्षरण हुआ है, जिससे रेगिस्तानीकरण, पानी की कमी और जैव विविधता के नुकसान जैसी पर्यावरणीय आपदाएँ हुई हैं।

अरावली प्रदेश की जोर पकड़ती माँग और “अरावली प्रदेश” के लाभ

 “छोटे राज्यों का गठन” के बारे में चर्चा आम है, जो संभवतः प्रोफेसर राम लखन मीना के “अरावली प्रदेश” प्रस्ताव के संदर्भ में या सामान्य रूप से भारत में छोटे राज्यों के निर्माण की अवधारणा से संबंधित है। इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझना होगा और भारतीय संदर्भ में इसके पक्ष-विपक्ष, और प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है। यदि आप इसे “अरावली प्रदेश” तक सीमित रखना चाहते हैं।

अरावली प्रदेश की जोर पकड़ती माँग और “अरावली प्रदेश” के लाभ

छोटे राज्यों का गठन: एक अवलोकन

भारत में छोटे राज्यों का गठन एक ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रक्रिया रही है, जो मुख्य रूप से भाषाई, सांस्कृतिक, क्षेत्रीय पहचान, और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर हुई है। स्वतंत्रता के बाद से, भारत के राज्य पुनर्गठन ने बड़े राज्यों को छोटी इकाइयों में विभाजित करने की माँग को बार-बार देखा है।

ऐतिहासिक उदाहरण

  1. 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम:
    भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ, जैसे आंध्र प्रदेश (तेलुगु), कर्नाटक (कन्नड़), और तमिलनाडु (तमिल)। यह बड़े औपनिवेशिक प्रांतों को छोटी इकाइयों में तोड़ने की शुरुआत थी।
  2. 2000 में तीन नए राज्य:
    • छत्तीसगढ़: मध्य प्रदेश से अलग
    • उत्तराखंड: उत्तर प्रदेश से अलग
    • झारखंड: बिहार से अलग
      इनका गठन क्षेत्रीय उपेक्षा और पहचान के आधार पर हुआ।
  3. तेलंगाना (2014):
    आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना, जो विकास में असमानता और सांस्कृतिक पहचान की लंबी लड़ाई का परिणाम था।

छोटे राज्यों के पक्ष में तर्क

  1. प्रशासनिक दक्षता:
    छोटे राज्य सरकार को जनता के करीब लाते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं पर तेजी से ध्यान देना संभव हुआ।
  2. स्थानीय विकास:
    संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है। छत्तीसगढ़ ने अपने खनिज संसाधनों का लाभ उठाकर औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया।
  3. सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान:
    छोटे राज्य स्थानीय भाषा, परंपराओं और समुदायों को संरक्षित करते हैं। जैसे, तेलंगाना में तेलुगु संस्कृति को अलग पहचान मिली।
  4. राजनीतिक सशक्तिकरण:
    हाशिए पर रहे समुदायों को नेतृत्व का मौका मिलता है। झारखंड में आदिवासी समुदायों की आवाज मजबूत होगी।

छोटे राज्यों के खिलाफ तर्क

  1. आर्थिक व्यवहार्यता:
    छोटे राज्य कभी-कभी स्वतंत्र रूप से आर्थिक रूप से टिक नहीं पाते। मिसाल के तौर पर, झारखंड में विकास हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार और संसाधन प्रबंधन की समस्याएँ बनी रहीं।
  2. प्रशासनिक लागत:
    नए राज्य का ढाँचा—जैसे विधानसभा, सचिवालय, और नौकरशाही—बनाने में भारी खर्च होता है।
  3. विखंडन का खतरा:
    बार-बार विभाजन से राष्ट्रीय एकता पर सवाल उठ सकते हैं। कुछ लोग इसे “बाल्कनीकरण” कहते हैं।
  4. अंतर-राज्य विवाद:
    जल, सीमा, और संसाधनों पर टकराव बढ़ सकता है, जैसे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी का विवाद।

भारत में गठन की प्रक्रिया

भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को नए राज्यों के गठन का अधिकार है। प्रक्रिया इस तरह है:

  1. माँग की शुरुआत:
    स्थानीय आंदोलन, राजनीतिक दल या समुदाय माँग उठाते हैं।
  2. राज्य विधानसभा की राय:
    संबंधित राज्य विधानसभा से राय ली जाती है (हालाँकि यह बाध्यकारी नहीं है)।
  3. केंद्र सरकार का प्रस्ताव:
    गृह मंत्रालय इसका मूल्यांकन करता है और संसद में विधेयक पेश करता है।
  4. संसदीय मंजूरी:
    दोनों सदनों में साधारण बहुमत से पास होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति से यह लागू होता है।
“अरावली प्रदेश” के संदर्भ में प्रोफेसर मीना का प्रस्ताव इस पैटर्न में फिट बैठता है। उनका तर्क है कि पूर्वी राजस्थान की उपेक्षा और बहुजन समुदायों की जरूरतें एक छोटे राज्य से पूरी हो सकती हैं। लेकिन इसके लिए व्यापक जन समर्थन, आर्थिक योजना, और राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए—जो अभी प्रारंभिक चरण में लगता है।

छोटे राज्यों का गठन भारत में सफल भी रहा है (तेलंगाना, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़) और चुनौतीपूर्ण भी (झारखंड की आर्थिक अस्थिरता)। यह इस बात पर निर्भर करता है कि नया राज्य अपनी विशिष्टता को कैसे भुनाता है और संसाधनों का प्रबंधन कैसे करता है। यदि आप किसी खास पहलू—आर्थिक प्रभाव या विशिष्ट उदाहरण—पर और जानना चाहते हैं, तो बताएँ। क्या आप “अरावली प्रदेश” पर ही केंद्रित जवाब चाहते हैं या सामान्य चर्चा ठीक है?

“अरावली प्रदेश” के लाभों पर चर्चा करने के लिए प्रोफेसर राम लखन मीना (@ProfRLMeena) के प्रस्तावित विचार को आधार बनाना होगा, जो पूर्वी राजस्थान के जिलों को एक अलग राज्य के रूप में गठित करने की वकालत करता है। यहाँ इसके संभावित लाभों को विस्तार से देखते हैं, जो सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक, और पर्यावरणीय पहलुओं पर आधारित हैं:

1. प्रशासनिक दक्षता और स्थानीय फोकस

  • तेज निर्णय प्रक्रिया:
    एक छोटा राज्य होने से सरकार स्थानीय समस्याओं—like ग्रामीण सड़कें, स्कूल, और अस्पताल—पर तेजी से ध्यान दे सकती है। अभी पूर्वी राजस्थान की जरूरतें जयपुर-केंद्रित प्रशासन में दब जाती हैं।
  • जमीनी स्तर तक पहुँच:
    छोटे राज्य में नौकरशाही और जनता के बीच की दूरी कम होगी, जिससे नीतियाँ अधिक प्रभावी होंगी। उदाहरण के लिए, टोंक या दौसा जैसे जिलों की उपेक्षा कम हो सकती है।

2. आर्थिक विकास और संसाधन उपयोग

  • खनिज संपदा का लाभ:
    अरावली क्षेत्र में संगमरमर, ताँबा, जस्ता, और अन्य खनिज प्रचुर हैं। एक अलग राज्य इनका स्थानीय स्तर पर बेहतर उपयोग कर सकता है, जिससे रोजगार और राजस्व बढ़ेगा। अभी ये संसाधन बड़े कॉर्पोरेट्स या राज्य के अन्य हिस्सों की ओर चले जाते हैं।
  • कृषि और पर्यटन:
    पूर्वी राजस्थान की उपजाऊ जमीन और अरावली की पहाड़ियाँ (जैसे रणथंभौर, सरिस्का) पर्यटन और कृषि को बढ़ावा दे सकती हैं। एक समर्पित प्रशासन इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकता है।
  • आर्थिक स्वायत्तता:
    स्थानीय कर और निवेश नीतियाँ क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से बनाई जा सकती हैं, बजाय इसके कि पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय मॉडल पर निर्भर रहें।

3. सामाजिक सशक्तिकरण

  • बहुजन समुदायों का उत्थान:
    प्रोफेसर मीना का जोर बहुजन (ओबीसी, एससी, एसटी) समुदायों पर है, जो इस क्षेत्र में बहुसंख्यक हैं। एक अलग राज्य उनकी शिक्षा, रोजगार, और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा दे सकता है। जैसे, मीणा और गुर्जर समुदायों को नेतृत्व के अधिक अवसर मिल सकते हैं।
  • आरक्षण का प्रभावी कार्यान्वयन:
    छोटे राज्य में आरक्षण नीतियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर लागू किया जा सकता है, जिससे जातिगत असमानता कम हो।

4. सांस्कृतिक पहचान और गर्व

  • स्थानीय संस्कृति का संरक्षण:
    अरावली क्षेत्र की सहरिया, भील, मीणा, गुर्जर, और अन्य जनजातीय परंपराएँ राजस्थान की राजपूत-केंद्रित पहचान में दबी रहती हैं। एक अलग राज्य इसे मुख्यधारा में ला सकता है।
  • क्षेत्रीय एकता:
    “अरावली प्रदेश” की पहचान लोगों में गर्व और एकता की भावना जगा सकती है, जैसा कि तेलंगाना या उत्तराखंड में देखा गया।

5. पर्यावरण संरक्षण

  • अरावली पर्वतों की रक्षा:
    अवैध खनन और वन कटाई से अरावली क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। एक समर्पित राज्य सरकार पर्यावरण नीतियों को सख्ती से लागू कर सकती है, जिससे जैव-विविधता और जल संसाधन बचे रहें।
  • सतत विकास:
    पर्यटन और खनन के बीच संतुलन बनाया जा सकता है, जो अभी बड़े राज्य के ढाँचे में मुश्किल है।

6. शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

  • शिक्षा पर ध्यान:
    प्रोफेसर मीना शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ हैं। एक छोटा राज्य सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को मजबूत करने पर केंद्रित नीतियाँ बना सकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • स्वास्थ्य सेवाएँ:
    स्थानीय स्तर पर अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जो अभी दूर-दराज के इलाकों में कम हैं।

तुलनात्मक उदाहरण

  • छत्तीसगढ़:
    मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ, हालाँकि भ्रष्टाचार एक चुनौती रहा। अरावली प्रदेश भी खनिजों से लाभ उठा सकता है।
  • उत्तराखंड:
    पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतों पर फोकस से बुनियादी ढाँचा बेहतर हुआ। अरावली के पहाड़ी जिलों को भी ऐसा लाभ मिल सकता है।

संभावित प्रभाव

“अरावली प्रदेश” बहुजन समुदायों के लिए एक प्रयोगशाला बन सकता है, जहाँ सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास को संतुलित करने की कोशिश हो। यह क्षेत्र की उपेक्षा को दूर कर सकता है और एक मॉडल राज्य बन सकता है, बशर्ते इसे सही योजना और नेतृत्व मिले।

यदि आप किसी खास लाभ आर्थिक या पर्यावरणीय—पर और गहराई से जानना चाहते हैं, तो बताएँ। क्या आप इसके पक्ष में उनके तर्कों को और विस्तार से पढ़ना-सुनना चाहते हैं?

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जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने 48 सीआई और 3 एसआई के किये तबादले

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 23 जनवरी 2025 | जयपुर : जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने एक आदेश जारी कर जयपुर सिटी में लगे हुए 48 सीआई और 3 एसआई के तबादले किये हैं। हैरानी की बात यह है कि इस बार तीन एसआई को जयपुर कमिश्नरेट के दो थानों की जिम्मेदारी दी हैं। जब की पुलिस लाइन में बड़ी संख्या में सीआई मौजूद हैं। 

जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने 48 सीआई और 3 एसआई के किये तबादले

राजस्थान में ट्रांसफर-पोस्टिंग का दौर जारी है। प्रदेश में तबादलों पर प्रतिबंध को 10 जनवरी से बढ़ा कर 15 जनवरी किया गया था। वहीं अब राजस्थान पुलिस विभाग में दो दिनों से भारी संख्या में तबादलों की सूची जारी हो रही है।

जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने 48 सीआई और 3 एसआई के किये तबादले

बीते मंगलवार यानी 14 जनवरी को पुलिस विभाग ने 27 सहायक उपनिरीक्षक और 64 हेड कॉन्स्टेबल के ट्रांसफर की सूची जारी की थी। अब बुधवार (15 जनवरी) को भारी संख्या में पुलिस इंस्पेक्टर के तबादले की सूची जारी की गई है।

नाम वर्तमान पद नवीन पद
महेश शर्मा बनीपार्क थाना बस्सी थाना
श्रीराम मीणा नवीन पदस्थापन तुंगा थाना
धर्मेंन्द्र शर्मा नवीन पदस्थापन एसएमएस थाना
आशुतोष (एसआई) अपराध शाखा कमिश्नरेट गांधी नगर थाना
महावीर यादव पुलिस लाइन करणी विहार थाना
मनीष शर्मा दौलतपुरा सेज थाना
भरतलाल मीणा जिला विशेष शाखा बिंदायका थाना
श्याम सुंदर एसआई अपराध शाखा कमिश्नरेट सिंधी कैम्प थाना
वीरेन्द्र कुरील नवीन पदस्थापन बनीपार्क थाना
लाखन सिंह नवीन पदस्थापन करधनी थाना
कविता शर्मा महेश नगर कालवाड़ थाना
सवाई सिंह नवीन पदस्थापन मुरलीपुरा थाना
नंदलाल जिला विशेष शाखा दौलपुरा थाना
मनोहर लाल अपराध सहायक जयपुर चाकसू थाना
हवा सिंह यादव नवीन पदस्थापन शिवदासपुरा थाना
उदय सिंह शेखावत नवीन पदस्थापन कोटखावदा थाना
इंदु शर्मा सेज महिला थाना दक्षिण
कैलाश चंद बिश्नोई भट्टा बस्ती अशोक नगर थाना
संतरा मीणा नवीन पदस्थापन ज्योति नगर थाना
बनवारी लाल नवीन पदस्थापन विद्यायकपुरी थाना
गुंजन वर्मा नवीन पदस्थापन महेश नगर थाना
मुकेश मीणा नवीन पदस्थापन भट्टा बस्ती थाना
रतन सिंह एसआई कालवाड़ नाहरगढ़ थाना
एकता राज नवीन पदस्थापन महिला थाना उत्तर
राजेश गौतम नवीन पदस्थापन ब्रह्मपुरी थाना
मंजु कुमारी मानसरोवर पर्यटक थाना
पूनम चौधरी विद्यायकपुरी थाना मेट्रो थाना
माधो सिंह अपराध शाका कमिश्नरेट दुर्घटना ईकाई पश्चिम
नवरतन धौलिया नवीन पदस्थापन टीआई उत्तर
गौतम डोटासरा नाहरगढ़ टीआई प्रथम दक्षिण
राजीव यदुवंशी बस्सी थाना टीआई ईस्ट
रमेश पारीक ज्योत नगर टीआई ईस्ट तृतीय
दिलीप कुमार सोनी पुलिस लाइन सड़क दुर्घटना इकाई उत्तर
मनोज बेरवाल नवीन पदस्थापन सड़क दुर्घटना इकाई दक्षिण
उमेश बेनीवाल अशोक नगर सड़क दुर्घटना इकाई पूर्व
जयदेव सिंह दुर्घटना थाना पश्चिम पुलिस लाइन
लक्ष्मी नारायण तुंगा थाना पुलिस लाइन
राज कुमार मीणा गांधी नगर थाना पुलिस लाइन
अब्दुल वहीद कोटखावदा पुलिस लाइन
मंजुला मीणा महिला थाना उत्तर पुलिस लाइन

कमिश्नर की ओर से जारी की गई लिस्ट में 25 सीआई और चार दुर्घटना अनुसंधान इकाइयों के प्रभारी बदले हैं। सीपी ने गांधी नगर,नाहरगढ़ और सिंधी कैम्प जैसे सबसे व्ययस्तम थानों में तीन एसआई को लगाया हैं।

इसमें रतसिंह एसआई को नाहरगढ़, आशुतोष एसआई को गांधी नगर और श्याम सुंदर एसआई को सिंधी कैम्प थाने की जिम्मेदारी दी गई हैं। आज इन सभी सीआई और एसआई को ज्यॉइनिंग करने के भी आदेश दिए गए हैं।

राजस्थान पुलिस महकमें में गुरुवार को बड़ा फेरबदल हुआ था

राजस्थान पुलिस महक में में गुरुवार को बड़ा फेरबदल हुआ है। मंगलवार को 179 पुलिस उपनिरक्षकों की तबादला सूची जारी की गई है। इन इंस्पेक्टर्स को एक रेंज से दूसरी रेंज में ट्रांसफर किया है। सबसे ज़्यादा तबादले जयपुर रेंज से हुए हैं, जहां 50 से ज़्यादा इंस्पेक्टर्स के तबादले हुए हैं। यह सूची अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सचिन मित्तल ने जारी की है।

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पुलिस मुख्यालय की ओर से 45 इंस्पेक्टर के ट्रांसफर की सूची जारी की गई है। इसके साथ ही सूची में 12 उन पुलिस इंस्पेक्टर के नाम शामिल किये गए हैं। जिनके ट्रांसफर को रद्द कर दिया गया है। बता दें, इससे पहले 8 जनवरी को प्रदेश में 179 पुलिस इंस्पेक्टर का तबादला किया गया था।

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