
मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 20 जुलाई 2024 | दिल्ली : दिल्ली एयरपोर्ट पर एक बुजुर्ग व्यक्ति को 14 जुलाई को अचानक हार्ट अटैक आ गया था। वे गिरकर बेहोश हो गए थे। वहां मौजूद एक महिला डॉक्टर ने तुरंत सीपीआर देकर उनकी जान बचाई। ये महिला डॉक्टर जयपुर की रहने वाली डॉ. प्रिया गर्ग हैं।
सैल्यूट डॉ प्रिया गर्ग सीनियर डीएमओ रेलवे हॉस्पिटल अजमेर
अजमेर के रेलवे हॉस्पिटल में सीनियर डीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। करीब 12 साल से अजमेर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉ. प्रिया गर्ग पति रमाकांत गोयल के साथ। दिल्ली एयरपोर्ट उनके पति भी साथ थे।

सवाल- बुजुर्ग की जान बचाने का आपका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है?
जवाब- एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट डॉ. प्रिया ने बताया 17 जुलाई को वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था। एयरपोर्ट पर किसी पैसेंजर ने बनाकर अपलोड किया होगा। लोगों का रिस्पेक्ट देखकर अच्छा लग रहा है। मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी। कई बार रिजल्ट बेहतर नहीं आने पर लोग डॉक्टर के खिलाफ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं है।
कई बार डॉक्टर के काफी प्रयास के बावजूद भी सफलता नहीं मिलती है। उस हालात में मरीज के परिवार के साथ ही डॉक्टर को भी काफी दुख होता है। डॉक्टर अपने मरीज का कभी बुरा नहीं चाहेगा। मेरा यही अनुरोध है कि किसी भी डॉक्टर पर हाथ उठाने से पहले या हिंसा करने से पहले इस चीज को हमेशा सोचें।
जवाब- डॉ. ने बताया कि वह अपने पति रमाकांत गोयल (रेडियोलॉजिस्ट) के साथ अमरनाथ यात्रा से लौट रही थीं। श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से जयपुर कनेक्टिंग फ्लाइट थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर रविवार को पहुंचे थे।
फ्लाइट ढाई घंटे लेट होने पर टर्मिनल- 2 पर इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट के फूड कोर्ट एरिया में रिफ्रेशमेंट ले रहे थे। पास के स्टॉल पर बुजुर्ग अंकल थे। वे अचानक बेहोश हो गए। मैं दौड़ते हुए उनके पास गई। एक अन्य डॉक्टर दंपती भी वहां मौजूद थे। हम आपस में किसी को नहीं जानते थे।
अंकल को चेक किया तो उनकी पल्स नहीं आ रही थी और सांस लेना भी बंद कर दिया था। उनका शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया था। उन्हें तुरंत सीपीआर देना शुरू किया गया। करीब 5 मिनट सीपीआर देने के बाद उन्होंने रिस्पॉन्स किया था। कुछ देर बाद अंकल की पल्स वापस आ गई। फिर भी सीपीआर देना चालू रखा।
एयरपोर्ट फैकल्टी ने भी मशीनों से चेक किया। पल्स वगैरह स्टेबल हो गई थी। डॉ. प्रिया ने बताया कि अंकल के पॉकेट से मोबाइल निकालकर स्क्रीन लॉक खुलवाया गया। उनकी वाइफ एयरपोर्ट पर ही थी। फोन के बाद वे स्टॉल के पास पहुंचीं। इसके बाद हॉस्पिटल ले जाया गया था।
सवाल- बुजुर्ग कहां के थे और अब उनकी स्थिति क्या है?
जवाब- डॉ. प्रिया ने बताया कि एयरपोर्ट पर अंकल का नंबर लिया था। बाकी ऐसे हालात नहीं थे कि ज्यादा बात हो पाती। एयरपोर्ट फैकल्टी के आने के बाद हम भी लौट आए थे। वापस आकर फोन जरूर किया था। तब उनके बेटे से बात हुई। उन्होंने बताया कि वे ठीक है और कार्डियक बाइपास सर्जरी हुई है। इसके अलावा उनके बारे में जानकारी नहीं है।
सवाल- अगर आप वहां नहीं होते तो क्या हो सकता था?
जवाब- अगर मैं नहीं होती तो कोई और होता.. क्योंकि जिसे ईश्वर को बचाना है, उसके लिए कोई न कोई रास्ता ढूंढ ही लेता है। मेरे होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा यही कहना है कि जो भी इस तरह के घटनाक्रम पर मौजूद रहे, वह तुरंत एक्शन ले। जिस तरीके का पॉजिटिव माहौल अभी बना है।
उससे शायद काफी लोगों को प्रेरणा मिलेगी। हमारे यहां नेगेटिव चीज ज्यादा और पॉजिटिव चीज कम वायरल होती है। यह चीज इतनी वायरल हुई कि शायद लोगों को पॉजिटिव मैसेज मिलेगा। इसके लिए मैं सभी लोगों का दिल से शुक्रिया करती हूं।
सवाल- कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) के मामले बढ़ रहे हैं, युवाओं में भी लगातार केस बढ़ने लगे हैं, कारण क्या है?
जवाब- कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक ही बात है। हार्ट को ही मेडिकल लैंग्वेज में कार्डियक बुलाया जाता है। युवाओं में बढ़ने का कारण दिनचर्या में बदलाव आना है। खान-पान में भी परिवर्तन हो गया है। पहले लोग पैदल चलते थे और अब सभी काम मशीनरी हो गए हैं। आजकल थोड़ी भी दूर जाना हो तो गाड़ी पर जाते हैं। बीपी, शुगर, मोटापा का कारण भी दिनचर्या में बदलाव आना है।
सवाल- सीपीआर के बारे में अभी भी कई लोग नहीं जानते, क्या है ये ?
जवाब- मरीज की हृदय गति बिल्कुल रुक जाती है और ब्लड का सर्कुलेशन थम जाता है। उस समय सीपीआर दिया जाना बहुत जरूरी होता है। हृदय गति रुकने से मरीज के अंगों को ऑक्सीजन और खून का पहुंचना बंद हो जाता है। ब्रेन को ऑक्सीजन और खून का पहुंचना कम हो जाता है। जब तक मरीज को हॉस्पिटल ले जाया जाता है, विंडो पीरियड निकल जाता है। उस समय सीपीआर देना स्टार्ट कर देना चाहिए। इससे मरीज के बचने के चांसेस बढ़ जाते हैं।
डॉ. प्रिया ने बताया- सीपीआर दो तरीके के होते हैं। इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट होता है और दूसरा एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट होता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट जो होता है वह सामान्य तरीके से करते हैं, जिसमें किसी तरह के उपकरण की जरूरत नहीं होती है।
मैंने जो किया, वह हैंड जोनली सीपीआर था, जिसमें सिर्फ हमें अपने हाथों का उपयोग करना होता है, जिसमें मरीज को पीठ के बल लेटाया जाता है। मरीज के लेफ्ट साइड में घुटने के बल बैठकर मरीज के सांस के रास्ते में रुकावट न हो उसे चेक करते हैं।
वह सिर्फ हमारे हाथों से किया जाता है। मरीज की छाती पर हथेलियों से दबाव बनाया जाता है। हमारी कोहनी इस दौरान मुड़नी नहीं चाहिए। इससे प्रेशर सीधा हार्ट की तरफ जा सकेगा।
पति भी डॉक्टर
डॉ. प्रिया गर्ग जयपुर की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई एसएमएस मेडिकल कॉलेज (जयपुर) से हुई है। डॉ. प्रिया ने बताया कि 12 साल से अजमेर में रह रही है। पति भी एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने X पर किया ट्वीट
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने X अकाउंट पर भी ट्वीट किया है। देवनानी ने लिखा- अजमेर रेलवे हॉस्पिटल में सीनियर डीएमओ जयपुर निवासी डॉक्टर प्रिया ने दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी सूझबूझ से सीपीआर देकर बुजुर्ग की जान बचाई। बुजुर्ग को हार्ट अटैक आया था।
उनकी यह सूझबूझ और साहसिक काम हम सभी को जागरूक करने वाला है। हार्ट अटैक आने के 5-6 मिनट के भीतर सीपीआर देने से व्यक्ति की जान बच सकती है और समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।