RAS का एग्जाम छोड़ पहुंची KBC की हॉट सीट पर नरेशी मीणा

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 24 अगस्त 2024 | सवाई माधोपुर : जब आप हॉट सीट पर बैठे हो तो 100 परसेंट श्योर कुछ नहीं लगता, यह भी यकीन नहीं होता कि आप अमिताभ बच्चन के सामने बैठे हो। सामने बिग-बी बैठे हो तो आप वैसे ही फ्रीज हो जाते हैं। यह कहना है कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख जीतने वाली सवाई माधोपुर की नरेशी मीणा का। अपने कोचिंग टीचर से इंस्पायर्ड होकर और नरेशी ने कौन बनेगा करोड़पति का सफर तय किया।

गेम शो की शूटिंग के लिए नरेशी ने जुलाई में हुई RAS की मुख्य परीक्षा भी छोड़ दी थी। सवाई माधोपुर के एंडा गांव की बेटी नरेशी मीणा (27) ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। अमिताभ बच्चन ने गेम शो के दौरान नरेशी का इलाज करवाने की भी बात कही।

RAS का एग्जाम छोड़ पहुंची KBC की हॉट सीट पर नरेशी मीणा

“कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता, जरा पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो” ऐसा ही कारनामा सवाई माधोपुर जिले के एक छोटे से एंडा गांव की बेटी नरेशी मीणा ने कर दिखाया है। दरअसल, नरेशी महानायक अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हॉट सीट पर पहुंची

RAS का एग्जाम छोड़ पहुंची KBC की हॉट सीट पर नरेशी मीणा

नरेशी ने 1 करोड़ के सवाल पर पर गेम छोड़ दिया था। सवाई माधोपुर के एंडा गांव की बेटी नरेशी मीणा की इस कामयाबी से पूरा गांव बेहद खुश है। नरेशी ने बताया कि जब वो गेम शो से लौटीं तो पूरे गांव ने उनका स्वागत किया।

‘केबीसी 16’ के लिए छोड़ा आरएएस का एग्जाम

इससे पहले नरेशी मीणा ने मूकनायक मीडिया ब्यूरो को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने ‘कौन बनेगा करोड़पति 16’ में शामिल होने के लिए आरएएस का एग्जाम छोड़ दिया। नरेशी मीणा ने बताया, ‘मैंने आरएएस मेन का एग्जाम मिस कर दिया।

20 और 21 जुलाई को मेरा आरएएस मेन एग्जाम था। मेरा जयपुर में सेंटर आया था। वो एग्जाम 2 दिन होते हैं, क्योंकि लिखना होता है, 4 पेपर होते हैं। तो मुझे लगा कि एक दिन पहले जाना पड़ता है, फिर आने-जाने में 3-4 दिन लग जाते। तो मैंने सोचा कि इस बार केबीसी को देते हैं अपना पूरा टाइम। तो मैंने अपना आरएएस का मेन एग्जाम छोड़ दिया।’

सवाई माधोपुर के एंडा गांव की बेटी नरेशी मीणा की इस कामयाबी से पूरा गांव बेहद खुश है। नरेशी ने बताया कि जब वो गेम शो से लौटीं तो पूरे गांव ने उनका स्वागत किया।

15वें सवाल तक पहुंचने वाली पहली कंटेस्टेंट

इसके बाद प्रोमो में अमिताभ बच्चन कहते हैं, ‘आपने ये ठान लिया है कि ये धनराशि यहां से जीतकर जाऊंगी, तो इसका इलाज हो सकता है।’ बिग बी खुलासा करते हैं कि नरेशी मीणा शो के इस सीजन की पहली कंटेस्टेंट बन गई हैं, जो 15वें सवाल तक पहुंची हैं। अमिताभ बच्चन कहते हैं, ‘इस सीजन में पहली बार 15वां सवाल, 1 करोड़ रुपये, ये रहा’। वैसे नरेशी मीणा ‘केबीसी 16’ की पहली करोड़पति बनने से रह गयीं।

इसी दौरान गंगापुर सिटी के योगेश ने कौन बनेगा करोड़पति में 25 लाख रुपए जीते। जिसकी खबर नरेशी ने पढ़ी और इसके बाद नरेशी केबीसी का सीरियल अपने ताऊजी के घर जाकर देखने लगी। उनका इंटरेस्ट जनरल नॉलेज में काफी बढ़ गया। वह विभिन्न साइटों से और समाचार पत्रों के माध्यम से अपना जनरल नॉलेज बढ़ाने लगी।

जिंदगी जीने का हौसला

इसके चलते नरेशी ने आरएएस का एग्जाम छोड़ दिया और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की हॉट सीट पर अमिताभ बच्चन से उनका सामना हुआ। नरेशी के पिता राजमल मीणा ने भी शूट के दौरान अमिताभ बच्चन से बातचीत की, जिसे उन्होंने काफी यादगार बताया। साल 2020 में वह महिला अधिकारिता विभाग में सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त हुई।

इसी के साथ ही उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे जारी रखा। इस दौरान वह RAS के एग्जाम में पास हुई। लेकिन RAS और कौन बनेगा करोड़पति की डेट आसपास थी। जिसके चलते नरेशी ने RAS का एग्जाम छोड़ दिया और कौन बनेगा करोड़पति की हॉट सीट पर जा पहुंची। जहां महानायक अमिताभ बच्चन से उनका सामना हुआ। 

नरेशी के पिता राजमल मीणा ने भी शूट के दौरान अमिताभ बच्चन से बातचीत की, जिसे उन्होंने काफी यादगार बताया।

सब इंस्पेक्टर के मेडिकल में ब्रेन ट्यूमर का चला पता

नरेशी ने बताया कि साल 2018 में उनकी जिंदगी में एक बेहद टर्निंग पॉइंट आया। वह SI का एग्जाम पास कर चुकी थी। इसके बाद मेडिकल होना था। मेडिकल के दौरान उन्हें पता चला कि उन्हें ब्रेन ट़्यूमर है। इस कारण वो लंबे समय तक डिप्रेशन में रहीं। नरेशी ने बताया कि वह यह सोचकर खूब रोती थी कि यह बीमारी उनके ही क्यों हुई। उनकी मां छोटी देवी, पिता राजमल और दोनों बड़े भाई शिवराम (31), लक्ष्मीकांत (28) ने उन्हें संभाला।

इतना ही नहीं आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद परिवार ने उनका अच्छे प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाया। मां ने नरेशी के इलाज के लिए अपने गहने तक बेच दिए। इस दौरान नरेशी ने सोचा कि नेगेटिविटी से परेशानी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती ही है। इसके बाद नरेशी पूरी सकारात्मकता के साथ उबरने की कोशिश में जुट गई। 3 भाई-बहन में नरेशी सबसे छोटी है। उनके दोनों बड़े भाई हमेशा हर मौके पर अपनी बहन को पूरा सपोर्ट करते हैं।

3 भाई-बहन में नरेशी सबसे छोटी है। उनके दोनों बड़े भाई हमेशा हर मौके पर अपनी बहन को पूरा सपोर्ट करते हैं।

ताऊजी के घर जाकर देखती थीं केबीसी

मां-बाप और भाइयों के मोटिवेशन से नरेशी ने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगी। इसी दौरान वर्ष 2017 में गंगापुर के योगेश ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में 25 लाख रुपए जीते। वो काफी चर्चाओं में रहे। इसके बाद योगेश कोचिंग टीचर बन गए। नरेशी ने भी उनसे कोचिंग ली है।

अपने कोचिंग टीचर से प्रेरित होकर और उनकी उपलब्धि सुनने-पढ़ने के बाद नरेशी का भी रूझान केबीसी की तरफ जाने लगा। खुद के घर में टीवी नहीं होने के कारण नरेशी केबीसी शो अपने ताऊजी के घर जाकर देखने लगी। इसके बाद वे अपनी जनरल नॉलेज को बढ़ाने की कोशिश करती रहीं।

माता पिता को देगी खूबसूरत तोहफा 

नरसी का कहना है कि यह उसके जीवन का सबसे यादगार पल था। उसने बेहद कठिन सवालों के जवाब देकर 50 लाख रुपये जीते। इन्हें जीतने के बाद नरसी की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। उसके काम की चर्चा देश, प्रदेश और हर जगह हो रही है। कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपये जीतकर जब नरसी अपने गांव आई तो गांव वालों ने फूल मालाओं और बैंड बाजे के साथ उसका स्वागत किया।

अपनी जीत पर और जीती गई रासि को लेकर नरसी का कहना है कि वह सवाई माधोपुर में किराए के मकान में रहती है। इसलिए वह इन पैसों से वहां एक मकान खरीदेगी। साथ ही वह अपनी मां के गहने दोबारा बनवाएगी। वह अपने पिता को एक खूबसूरत तोहफा भी देगी।

पॉलिटिकल साइंस से किया पोस्ट ग्रेजुएशन

नरेशी ने अपने गांव की ही सरकारी स्कूल से 9वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कक्षा 10 उन्होंने नजदीकी गांव की श्यामपुरा स्कूल से पास की। 11वीं और 12वीं कक्षा सवाई माधोपुर के सुरभि पब्लिक स्कूल से पास की। साल 2015 में उन्होंने बीए में एडमिशन लिया और साल 2017 में हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और हिंदी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। इसके बाद उन्होंने पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

मां-बाप के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं नरेशी

केबीसी के लिए 18-19 जुलाई को सवाई माधोपुर में शूट हुआ था। इसके बाद नरेशी को 26 जुलाई को मुंबई बुलाया गया, जहां वो अपने पिता और बुआ के लड़के के साथ गई थी। करीब एक सप्ताह बाद 2 अगस्त को वापस गांव लौटी। नरेशी का डीजे और बैंडबाजे के साथ जोरदार स्वागत किया गया। नरेशी की मां ने उनसे कहा कि शाबाश बेटा, मेरी बेटी ने मेरा नाम रोशन कर दिया।

नरेशी बताती है कि 50 लाख रुपए जीतने के बाद अब वह अपनी मां की ज्वेलरी फिर से बनवा पाएंगी। अपने पिता को भी एक खूबसूरत सा तोहफा देंगी। वह सवाई माधोपुर में किराए से रहती हैं तो इन पैसों से सवाई माधोपुर में मकान खरीदने का मन बना रही हैं।

अमिताभ ने चीलगाड़ी शब्द को डायरी में नोट किया

अमिताभ बच्चन ने नरेशी के पिता से शूट के दौरान पूछा कि वह मुंबई कैसे आए हैं। जिस पर नरेशी के पिता राजमल ने उन्हें बताया कि वह चीलगाड़ी में बैठकर यहां आए हैं। यह सुनकर अमिताभ ने कहा कि यह चीलगाड़ी क्या होती है, तो उन्होंने बताया कि उनके गांव में प्लेन को ही चीलगाड़ी कहते हैं। जिस पर अमिताभ बच्चन ने इस शब्द को अपनी डायरी में नोट कर लिया। अमिताभ बच्चन ने करीब 4 महीने पहले 16वें सीजन की शूटिंग स्टार्ट की थी। इस दौरान उनकी सेट से कई फोटो भी सामने आई थी।

अमिताभ बच्चन ने करीब 4 महीने पहले 16वें सीजन की शूटिंग स्टार्ट की थी। इस दौरान उनकी सेट से कई फोटो भी सामने आई थी।

अमिताभ बच्चन कराएंगे नरेशी मीणा का ब्रेन ट्यूमर का इलाज

सवाई माधोपुर के एंडा गांव की नरेशी मीणा ने अमिताभ बच्चन को बताया कि उसे ब्रेन ट्यूमर की बीमारी है। उसने ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन तो कराया था, लेकिन इस ट्यूमर का कुछ हिस्सा अब भी उसके दिमाग में है। यह ट्यूमर उसके दिमाग में ऐसी जगह फंसा है, जिसे निकालना जानलेवा साबित हो सकता है।

नरेशी ने कहा था कि ब्रेन ट्यूमर का एडवांस इलाज कराने के लिए उन्हें चिकित्सकों की तरफ से प्रोटोन ट्रीटमेंट का सुझाव दिया था, लेकिन यह ट्रीटमेंट काफी महंगा होने की वजह से वह ट्रीटमेंट नहीं करा पाई।

केबीसी में आने का उसका मुख्य उद्देश्य ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए रुपए इकट्ठा करना था। लेकिन जब अमिताभ बच्चन ने उनकी कहानी सुनी तो वो भावुक हो गए । और उन्होंने उसके ब्रेन ट्यूमर का इलाज कराने वादा किया, कि वह स्वयं उसका पूरा खर्चा उठाएंगे।

अब जानते हैं केबीसी में कैसे होती हैं एंट्री

स्टेप 1- कंटेस्टेंट की तैयारी शो टेलीकास्ट होने से तकरीबन 4 महीने पहले शुरू हो जाती है। पहला प्रोमो लॉन्च होने के बाद, रोजाना रात 9 बजे सोनी चैनल पर अमिताभ बच्चन दर्शकों से एक सवाल पूछते हैं, जिसका जवाब देना होता है। सोनी लिव ऐप पर इसका रजिस्ट्रेशन होता है।

स्टेप 2- प्रोडक्शन टीम रजिस्टर किए हुए कंटेस्टेंट में से कुछ को चुनती है फिर उन्हें कॉल बैक करती है। कॉल पर उनसे तीन सवाल किए जाते हैं। पहले दो सवाल में 4 विकल्प दिए जाते हैं। हर सवाल के इन 4 विकल्प में से एक सही जवाब देना होता है।

आखिरी सवाल नंबर-बेस्ड होता है। उदाहरण के तौर पर- भारत को आजादी कब मिली थी? इसका जवाब देने के लिए फोन के कीपैड पर 1947 टाइप करना होता है। तीनों सवालों के सही जवाब देने पर अगले स्टेप के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है।

स्टेप 3- तीसरा स्टेप ऑडिशन का होता है। ज्यादातर ऑडिशन मुंबई में ही होते हैं। मुंबई से बाहर से चुने गए कंटेस्टेंट को उनकी उपलब्धता के हिसाब से मुंबई बुलाया जाता है। इसका पूरा खर्चा टीम ही उठाती है।

इस लेवल पर कंटेस्टेंट के लाइव ऑडिशन होते हैं। तकरीबन 20 सवालों का लाइव जवाब देना होता है – कुछ लिखकर तो कुछ वीडियो राउंड में। कंटेस्टेंट की पर्सनल लाइफ की डिटेल्स, इसी वीडियो में कैप्चर होते हैं।

स्टेप 4- यदि किसी कंटेस्टेंट ने सभी सवालों का सही जवाब दिया तो टीम उन्हें फिर से मुंबई बुलाती है। शो में शामिल होने की तैयारी शुरू हो जाती है। फास्टेस्ट-फिंगर राउंड से पहले कई बार रिहर्सल होती है। इस रिहर्सल का मकसद बस यही होता है कि कंटेस्टेंट से कोई चूक न हो जाए।

यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट की एससी-एसटी एक्ट कमजोर करने की एक और कोशिश 

स्टेप 5- सबसे कम समय में जवाब देने वाले कंटेस्टेंट को अमिताभ बच्चन खुद हॉट सीट तक लेकर जाते हैं।

स्टेप 6- हॉट सीट पर सवालों का सही जवाब देकर, कंटेस्टेंट करोड़ों रूपए जीतने का सपना साकार कर सकता है।

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राजस्थान में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने, कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 09 मार्च 2025 | जयपुर :  प्रदेश में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने और कोचिंग सेंटर पर कंट्रोल के लिए सरकार बिल लायेगी। सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट कंट्रोल्ड एंड रेगुलेशन बिल 2025 को मंजूरी दी गई है। विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में ही इस बिल को पारित करवाने की तैयारी है।

राजस्थान में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने, कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

बिल के प्रावधानों के मुताबिक 50 या इससे ज्यादा विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटर्स को कानूनी दायरे में लाया जायेगा। 50 या इससे ज्यादा स्टूडेंट वाले कोचिंग सेंटर्स को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। प्रदेश में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट कंट्रोल्ड एंड रेगुलेशन अथॉरिटी का गठन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के प्रभारी सचिव इस अथॉरिटी के अध्यक्ष होंगे।

कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

पोर्टल और एप बनेगा

कोचिंग सेंटर्स पर मॉनिटरिंग और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक राज्य स्तरीय पोर्टल और काउंसिलिंग के लिए हेल्पलाइन भी बनाई जाएगी। इस बिल के कानून के बाद हर कोचिंग सेंटर को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य हो जायेगा।

कोचिंग सेंटर्स पर निगरानी बढ़ेगी, फीस लौटाने के प्रावधान भी होंगे

बिल में कोचिंग सेंटर्स पर निगरानी और नियंत्रण के कड़े प्रावधान होंगे। कोचिंग सेंटर्स मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। स्टूडेंट्स को तनाव मुक्त माहौल देना होगा। स्टूडेंट की मेंटल हेल्थ को ध्यान में रखना होगा। बीच में कोचिंग छोड़ने वाले स्टूडेंट्स को फीस लौटाने के प्रावधान भी बिल में शामिल होंगे। जोगाराम पटेल ने कैबिनेट के के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और संपत्ति जब्त करने तक के प्रावधान

कोचिंग सेंटर पर कंट्रोल वाले बिल में नियमों के उल्लंघन पर कड़ी करवाई का प्रावधान है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा- कोचिंग में पढ़ने वाले युवाओं में जिस तरह का तनाव बढ़ रहा था और जो घटनाएं हो रही थी, वो चिंताजनक थी। बिल में कोचिंग सेंटरों की मान्यता रद्द करने, भारी जुर्माना लगाने और लैंड रेवेन्यू एक्ट के हिसाब से जब्ती तक के प्रावधान होंगे।

जोगाराम पटेल ने कैबिनेट के के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

राज्य की नई कौशल नीति को मंजूरी, नीति में कई प्रावधान

कैबिनेट ने राज्य की नई कौशल नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के अनुसार इंडस्ट्री की मांग के अनुसार कुशल प्रोफेशनल और कामगार तैयार किए जायेंगे। युवाओं को इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से स्किल डवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार पाने के योग्य बनाया जायेगा।

आईटीआई को उन्नत कौशल विकास केंद्र के तौर पर विकसित करेंगे

नई कौशल नीति के अनुसार प्रदेश की सभी आईटीआई को नए जमाने के हिसाब से उन्नत कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। संभाग मुख्यालय में मॉडल करियर सेंटर बनाये जायेंगे। वहां पर युवाओं को करियर काउंसिलिंग से लेकर इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जायेगी।

प्रदेश भर में अलग-अलग सेक्टर के अनुभवी श्रमिकों के कौशल का सर्टिफिकेशन किया जायेगा। इसके लिए कैंप लगाए जायेंगे। स्किल यूनिवर्सिटी का मॉडर्नाइजेशन करके विशेष कौशल केंद्र बनाए जायेंगे।

प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर नीति को मंजूरी

कैबिनेट में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर नीति 2024 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत सरकारी दफ्तरों में विशेष योग्यजन की एंट्री को आसान और बाधा मुक्त बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के सभी संस्थाओं में ऐसी सुविधा विकसित की जायेगी, जिससे कि दिव्यांगजनों को आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हो।

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दिव्यांग कर्मचारी के लिए भी सभी सरकारी दफ्तर में उनके सुविधा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जायेगा। सारी सुविधाएं भारत सरकार के मापदंडों के हिसाब से विकसित की जाएगी, इसके तहत रैंप बनाने से लेकर इजी अप्रोच के लिए जरूरी सभी संसाधन विकसित किये जायेंगे।

दिव्यांगों के तबादले कम से कम होंगे, रोटेशनल ट्रांसफर से मुक्त रखेंगे

इस नीति के तहत दिव्यांगों को रोटेशनल टाइप ट्रांसफर से मुक्त रखा जायेगा और उनके तबादले कम से कम हो यह कोशिश होगी। हर विभाग दिव्यांगों की भर्ती की देखरेख उनकी नियुक्ति और उनके रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिए संपर्क अधिकारी को नियुक्त करेगा।

कर्मचारियों को अब ग्रेच्युटी का लाभ 1 जनवरी 2024 से मिलेगा

सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के अनुसार 1 जनवरी से बढ़ी हुई ग्रेजुएट ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दी है। सरकार ने बजट में इसकी घोषणा की थी। राज्य सरकार ने रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेट ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा हाली 20 लाख से बढ़कर 25 लख रुपए की है।

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जापान में हिंदी भाषा को मिल रही है व्यापक लोकप्रियता

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 29 दिसंबर 2024 | जयपुर : जापान में हिंदी भाषा तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। जापानी छात्रों के बीच विदेशी भाषा के तौर पर हिंदी और फ़्रेंच सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं। जापान में हिन्दी सीखने के लिए टोक्यो और ओसाका विश्वविद्यालय में अलग हिंदी विभाग हैं। इन विभागों में भाषा और साहित्य को समान रूप से महत्व दिया जाता है।

जापान में हिंदी भाषा को मिल रही है व्यापक लोकप्रियता

जापान में हिंदी भाषा को व्यापक लोकप्रियता (ヒンディー語は日本でも広く普及しています) मिल रही है। जापान के साथ भारत ने अक्टूबर 2018 में एक मेमोरेंडम (Memorandum of Understanding) साइन किया था। इसमें भारतीय ऑन जॉब ट्रेनिंग के लिए जापान आ जा सकते हैं। मेमोरेंडम की बड़ी वजह जापान में उम्र की समस्या है।

जापान में हिंदी भाषा को मिल रही है व्यापक लोकप्रियता (ヒンディー語は日本でも広く普及しています)

दरअसल जापान में स्वस्थ जीवन शैली और स्वास्थ्य संसाधन होने के कारण एक बड़ी आबादी उम्र दराज लोगों की है। जापान में युवाओं की संख्या कम है जिसकी वजह से वहां तकनीकी कामगारों की कमी हो चुकी है। ऐसे में वहां की सरकार ने दूसरे देशों के युवाओं के लिए दरवाजा खोल दिया है।

बुजुर्गों के देश कहे जाने वाले जापान में इन दिनों रोजगार के विभिन्न सेक्टरों में युवाओं का संकट गहरा रहा है। यही वजह है कि जापान में 70 से ज्यादा सेक्टर ऐसे हैं जिनमें हर कहीं काम के लिए योग्य प्रोफेशनल की जरूरत महसूस हो रही है।

लिहाजा जापान की कई ह्यूमन रिसोर्सेज एजेंसी अब जापान में युवा प्रोफेशनल की कमी दूर करने के लिए भारत की तरफ (Job Opportunities in Japan for Indians) रुख कर रही हैं । इतना ही नहीं कई ऐसी कंपनियां तो ऐसी हैं जो जापानी बोल सकने वाले युवाओं को हाथों-हाथ रोजगार देने के लिए तैयार हैं।

दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारत को ह्यूमन रिसोर्स कैपिटल

भारत में युवाओं की सबसे बड़ी आबादी के मद्देनजर दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारत को ह्यूमन रिसोर्स कैपिटल की तरह देखा जा रहा है। इसके अलावा भारत में रोजगार की संभावनाएं लगातार कम होने से बड़ी संख्या में हर साल रोजगार की तलाश में भारतीय प्रोफेशनल विदेशों की तरफ रुख कर रहे हैं।

इस बीच जापान में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के अलावा नर्सिंग और टेक्निकल पेशेवरों की बड़ी मांग है। जापान की कंपनियों के लिए विदेशी कुशल श्रमिकों की बड़ी जरूरत है। फिलहाल जापान में स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 4:50 लाख युवाओं की जरूरत जापान में हैं, जिस के विपरीत भारत से जापान जाने वाले पेशेवरों की संख्या हजारों में भी नहीं है।

इसकी वजह यही है कि भारतीय प्रोफेशनल विभिन्न सेक्टर में पारंगत तो है लेकिन उन्हें जापानी भाषा नहीं आती ऐसी स्थिति में जापान की कई प्लेसमेंट एजेंसी अब भारत में कई स्थानों पर जापानी भाषा सिखाने वाले संस्थानों से अनुबंध कर कई भारतीय प्रोफेशनल को जापान में नौकरी देना चाहती हैं।

दिल्ली, जयपुर और इंदौर में जापानी कंपनियों का डेरा

हाल ही में इंदौर के अलावा दिल्ली और अन्य शहरों में जापान के एमएस इशीमातो, एमएस मियामोटो समेत रादूरी ओम प्रकाश आदि जापानी कंपनियों के प्रतिनिधि भारत में योग्य युवा प्रोफेशनल को अपनी कंपनियों में जॉब ऑफर करने पहुंच रहे हैं। इनकी शर्त यही है कि पहले भारतीय युवा भारत में ही जापानी भाषा सीख लें। इसके बाद जापान की कंपनियां उन्हें उनकी योग्यता अनुसार जापान में जॉब ऑफर कर देगी।

जापानी भाषा जानने वालों को प्राथमिकता

जापान अर्थव्यवस्था के लिहाज से आर्थिक महाशक्ति माना जाता है। इसलिए दुनिया भर के देशों से युवा वहां रोजगार की संभावना लिए पहुंच रहे हैं। जापान में फिलहाल एग्रीकल्चर, होटल एवम् बिल्डिंग प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारतीय युवाओं के लिए अवसर है।

इसके अलावा जापान में बुजुर्गों की देखभाल के लिए भी भारतीय युवाओं को मौका मिल सकता है। इन सभी कामों के लिए जापानी भाषा की समझ होना जरूरी है। जिसके लिए या तो विभिन्न स्तर पर ट्रेनिंग दी जा रही है या फिर जापानी भाषा जानने वालों को प्राथमिकता मिल रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी जापान यात्रा से हिंदी की संभावना बढ़ी 

जापान के अलावा यूरोपीय देशों से भी भारत को ह्यूमन रिसोर्स कैपिटल के रूप में देखा जाने लगा है। इनमें स्वीडन भी एक ऐसा देश है जहां अपने लोगों के बाहर जाने की वजह से भारतीय युवाओं को वहां बुलाया जा रहा है। इसके अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस से भी भारतीय युवाओं को कई अवसर मिल रहे हैं।

तेमुरनिकर के अनुसार, जापानी छात्र अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए एशियाई और पश्चिमी देशों की संस्कृतियों को भी जानना चाहते हैं। जीआइआइएस के 16 कैंपस में 15 हजार छात्र हिंदी भाषा सीख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी जापान यात्रा के दौरान टोक्यो में एक जापानी छात्र को हिंदी बोलते देख चौंक गये थे। इससे साफ जाहिर होता है कि विदेश में हिंदी सीखने वालों की भरमार है।

जापान में हिन्दी सीखने के बारे में कुछ और बातेंः

  • जापान के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल (जीआइआइएस) के 16 कैंपस में 15 हज़ार छात्र हिंदी सीख रहे हैं।
  • जापानी छात्र अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए एशियाई और पश्चिमी देशों की संस्कृतियों को भी जानना चाहते हैं।
  • जापान के कुछ छात्र संस्कृत भाषा, भारतीय प्राच्य इतिहास जैसे विभागों में पढ़ते हुए भी हिंदी सीख रहे हैं।

हाल में ही जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड बैठक हु ई थी। इस बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टोक्यो में वर्तमान पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले जापान के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की।

पीएम मोदी की ये बैठकें योशीहिदे सुगा, शिंजो आबे और योशिरो मोरी के साथ हुई हैं। जापान के पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ पीएम मोदी की मुलाकात उनकी सद्भावना और व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाती हैं।

योशिरो मोरी जापान-भारत संघ (जेआईए) के वर्तमान अध्यक्ष हैं, जबकि शिंजो आबे शीघ्र ही इस भूमिका को संभालेंगे। 1903 में स्थापित जेआईए (JIA)जापान के सबसे पुराने मैत्री संघों में से एक है।  प्रधान मंत्री मोदी ने राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में मोरी के नेतृत्व में जेआईए द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

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