देश के टॉप 10 एग्रीकल्चर कॉलेज, पहले नंबर पर IARI दिल्ली

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 21 सितंबर 2024 | जयपुर : देशभर में 12वीं के बाद एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए एंट्रेंस एग्जाम हो चुके हैं। एग्रीकल्चर के लिए देश में सबसे प्रतिष्ठित दिल्ली के इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट 23 सितंबर को पहले चरण की काउंसलिंग के बाद सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी कर देगा।

देश के टॉप 10 एग्रीकल्चर कॉलेज, पहले नंबर पर IARI दिल्ली

देश के टॉप 10 एग्रीकल्चर कॉलेज

ऐसे में इस बार टॉप कॉलेज में जानेंगे एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए देश के टॉप 10 कॉलेज, कोर्सेज और एडमिशन प्रोसेस..

1. इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, दिल्ली

ICAR दिल्ली एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट है। यहां एग्रीकल्चरल केमिकल्स, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चरल फिजिक्स, बायोकेमिस्ट्री, कंप्यूटर एप्लिकेशन जैसे 26 एकेडमिक डिपार्टमेंट्स हैं। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1923 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां 12वीं के बाद BSc Hons एग्रीकल्चर, BTech एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, BTech बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में 12वीं के बाद ICAR UG एंट्रेंस एग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है।

इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1923 में हुई थी।

2. ICAR – नेशनल डेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल

ये एक सरकारी रिसर्च इंस्टीट्यूट है। इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस दिया गया है। यहां फूड टेक्नोलॉजी, एनिमल केयर जैसे डिपार्टमेंट्स हैं। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1923 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां BTech डेरी टेक्नोलॉजी, BTech फूड टेक्नोलॉजी जैसे दो अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम और 14 पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए ICAR UG एग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है।

इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1923 में हुई थी।

3. पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना

इस यूनिवर्सिटी में कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कॉलेज ऑफ होम साइंस एंड कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज जैसे कॉलेज जुड़े हैं। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1962 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां से 12वीं के बाद BTech फूड टेक्नोलॉजी, BSc Hons एग्रीकल्चर, BTech बायोटेक्नोलॉजी, BSc Hons न्यूट्रीशियन एंड टेक्नोलॉजी जैसे 7 अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए यूनिवर्सिटी लेवल पर होने वाला CET एग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1962 में हुई थी।

4. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए अलग से डेडिकेटेड इंस्टीट्यूट है – इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 4 फरवरी 1916 को हुई थी।

कोर्सेज : यहां से 12वीं के बाद BSc Hons एग्रीकल्चर और MSc में एग्रीकल्चर से जुड़े अलग-अलग 6 स्पेशलाइजेशन में पढ़ाई कर सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए यूनिवर्सिटी लेवल पर होने वाला UET-Ag एग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 4 फरवरी 1916 को हुई थी।

5. इंडियन वेटेरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली

इंडियन वेटेरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट वेटेरनरी मेडिसिन में एडवांस्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट है। ये एक सरकारी इंस्टीट्यूट है। इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस दिया गया है। देश भर में इस इंस्टीट्यूट के 7 रीजनल कैंपस हैं। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1889 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां 12वीं के बाद बैचलर्स ऑफ वेटेरनरी साइंसेज में एडमिशन ले सकते हैं।

इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1889 में हुई थी।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : NEET UG , ICAR UG जैसे एंट्रेंस एग्जाम के स्कोर के बेसिस पर एडमिशन ले सकते हैं।

6. तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर

ये तमिलनाडु की सरकारी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी है। मद्रास के एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट को मिलाकर ये यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1965 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां से BSc Hons एग्रीकल्चर, BSc Hons बिजनेस मैनेजमेंट, BSc Hons सेरीकल्चर, BTech फूड टेक्नोलॉजी, BTech बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए कोई एंट्रेंस एग्जाम देना जरूरी नहीं है। 12वीं के मार्क्स के बेसिस पर अप्लाई कर सकते हैं।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1965 में हुई थी।

7. चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार

ये हरियाणा की सरकारी यूनिवर्सिटी है। ये एशिया की सबसे बड़ी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी है। यूनिवर्सिटी कैंपस 8,645 एकड़ एरिया में बसा है। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1970 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां BSc Hons एग्रीकल्चरल और BTech एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए इंस्टीट्यूट लेवल पर होने वाले एग्रीकल्चरल एप्टीट्यूड टेस्ट में अप्लाई कर सकते हैं।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1970 में हुई थी।

8. जी बी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर

ये देश की पहली एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी है। यहां एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट, बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज, कम्युनिटी साइंस, वेटरनेरी एंड एनिमल साइंसेज जैसे 8 डिपार्टमेंट्स हैं। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1960 में की थी।

कोर्सेज : यहां BSc इन एग्रीकल्चर, BE फूड टेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए यूनिवर्सिटी लेवल एंट्रेंस एग्जाम देना जरूरी है। इसके अलावा NEET UG, JEE मेन्स जैसे एग्जाम के बेसिस पर एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1960 में की थी।

9. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, फिशरीज यूनिवर्सिटी

ये इंस्टीट्यूट ICAR की एकेडमिक ब्रांच है। यहां एक्वाकल्चर, फिशरीज रिसोर्सेज, हार्वेस्ट एंड पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, फिश जेनेटिक्स एंड बायोटेक्नोलॉजी, सोशल साइंसेज जैसे डिपार्टमेंट्स हैं।

कोर्सेज : यहां ग्रेजुएशन के बाद 11 अलग-अलग स्पेशलाइजेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकते हैं।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में मेरिट बेसिस पर एडमिशन ले सकते हैं।

इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1961 में हुई थी।

10. शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर

ये एक सरकारी यूनिवर्सिटी है। यहां एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, एनवायर्नमेंटल, वेटेरनरी एंड एनिमल साइंसेज जैसे डिपार्टमेंट्स हैं। इस इंस्टीट्यूट की स्थापना 1961 में हुई थी।

कोर्सेज : यहां BSc वेटेरनरी साइंसेज, BSc इन फॉरेस्ट्री, BSc ऑफ फिशरीज साइंस जैसे कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं।

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1982 में हुई थी।

ऐसे मिलेगा एडमिशन : इन कोर्सेज में SKUAST एग्जाम यानी यूनिवर्सिटी लेवल एंट्रेंस एग्जाम के बेसिस पर एडमिशन ले सकते हैं।

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फर्जी डिग्री सरगना जेएस यूनिवर्सिटी के कुलपति, रजिस्ट्रार और दलाल गिरफ्तार

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 09 मार्च 2025 | जयपुर : फर्जी डिग्री मामले में शनिवार को राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने जेएस यूनिवर्सिटी, शिकोहाबाद के कुलाधिपति सुकेश यादव, रजिस्ट्रार नंदन कुमार और दलाल अजय भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया। सुकेश विदेश भागने की फिराक में थे। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा गया। वहीं, रजिस्ट्रार नंदन की शिकोहाबाद व दलाल अजय की गिरफ्तारी जयपुर से हुई।

फर्जी डिग्री सरगना जेएस यूनिवर्सिटी के कुलपति, रजिस्ट्रार और दलाल गिरफ्तार

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने ​बैक डेट में फर्जी डिग्री जारी करने वाले जेएस यूनिवर्सिटी के चांसलर, रजिस्ट्रार और दलाल को अरेस्ट किया है। इस यूनिवर्सिटी से 245 अभ्यर्थी फर्जी डिग्री लेकर पीटीआई बने थे। जेएस यूनिवर्सिटी के चांसलर सुकेश कुमार, रजिस्ट्रार नंदन मिश्रा और जयपुर निवासी दलाल अजय भारद्वाज को एसओजी ने पकड़ा है।

जेएस यूनिवर्सिटी के कुलपति, रजिस्ट्रार और दलाल गिरफ्तार

विदेश भागने की फिराक में था चांसलर सुकेश कुमार

एसओजी के एडीजी वीके सिंह ने बताया- शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 के मामले में शनिवार को जेएस यूनिवर्सिटी के चांसलर सुकेश कुमार, रजिस्ट्रार नंदन मिश्रा और जयपुर निवासी दलाल अजय भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। इन्होंने अभ्यर्थियों को घर बैठे फर्जी डिग्रियां दी थी। फर्जीवाड़े में एसओजी पूर्व में ओपीजेएस विश्वविद्यालय के चांसलर-संचालक और पूर्व रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर चुकी है।

जेएस यूनिवर्सिटी के चांसलर सुकेश कुमार, रजिस्ट्रार नंदन मिश्रा और जयपुर निवासी दलाल अजय भारद्वाज को एसओजी ने पकड़ा है।

वीके सिंह ने बताया- चांसलर सुकेश कुमार वर्तमान में राजकीय कॉलेज आगरा में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत है। इसने जेएस विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार नंदन मिश्रा, दलाल अजय भारद्वाज और अन्य के मार्फत यूनिवर्सिटी की बीपीएड कोर्स की बैक डेट में फर्जी तरीके से डिग्रियां जारी की।

जैसा कि पहले बताया गया है उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद कस्बे में स्थित जेएस यूनिवर्सिटी से जुड़े इन व्यक्तियों ने ​लाखों रुपए में सौदा कर सैकड़ों फर्जी डिग्रियां अभ्यर्थियों को घर बैठे दी थी। सुकेश कुमार एसओजी की कार्रवाई का अंदेशा होने पर विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन एसओजी ने उसको दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी तरीके से बैक डेट में दी डिग्रियां

संचालक सुकेश कुमार ने अपने पिता जगदीश सिंह के नाम पर इस विश्वविद्यालय का नाम जेएस विश्वविद्यालय रखा है। दलाल अजय भारद्वाज ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से भी हजारों छात्रों को विभिन्न कोर्सेज की फर्जी तरीके से बैक डेट में डिग्रियां दिलवा चुका है।

पेपर माफिया भूपेंद्र सारण के घर से फर्जी डिग्रियां जब्त होने के मामले में भी यह जयपुर में गिरफ्तार हो चुका है। अपने साथियों से मिलकर अजय एकलव्य ट्राइबल यूनिवर्सिटी (पूर्व सुधासागर विश्वविद्यालय) डूंगरपुर और अनंत इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, मेघालय स्थापित करने जा रहा है।

एसओजी की जांच में सामने आया कि एक ही शिक्षा सत्र में प्रवेश लेने वाले सभी अभ्यर्थियों का चयन इस परीक्षा में हुआ था। यह सभी राजस्थान के निवासी थे। पीटीआई परीक्षा में अनेक विद्यार्थियों ने आवेदन के समय अलग-अलग विश्वविद्यालय का उल्लेख किया।

जबकि चयन के बाद जेएस विश्वविद्यालय की डिग्रियां दी। इस परीक्षा में आवेदन के समय कुल 2067 अभ्यर्थियों ने अपनी बीपीएड की डिग्री जेएस विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण/अध्ययनरत होने का उल्लेख किया, जो निर्धारित सीटों से कई गुना ज्यादा है।

पेपर लीक माफिया में फर्जी डिग्री के लिए जेएस यूनिवर्सिटी कुख्यात

एडीजी सिंह ने बताया- पूर्व की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक माफियाओं ने अयोग्य अभ्यर्थियों के लिए निजी विश्वविद्यालयों से पैसे देकर बड़ी संख्या में बैक डेट में डिग्रियां उपलब्ध करवाई थी। परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थी फॉर्म भरते समय जान-बूझकर ऐसे निजी विश्वविद्यालय का नाम उल्लेख करते थे, ताकि चयनित होने पर आसानी से पैसे देकर बैक डेट में डिग्री का इंतजाम किया जा सके।

यह भी पढ़ें : राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में प्रदेश से बाहर के वाइस चांसलर की नियुक्ति का भारी विरोध

वीके सिंह ने बताया- पेपर लीक गैंग के सदस्यों के बीच में इस काम के लिए जेएस यूनिवर्सिटी शिकोहाबाद कुख्यात थी। इस परीक्षा में 2067 अभ्यर्थियों ने परीक्षा का फॉर्म भरते समय खुद को जेएस यूनिवर्सिटी का विद्यार्थी होना और डिग्री प्राप्त होने का उल्लेख किया था, जो कि इस यूनिवर्सिटी के इस कोर्स के लिए स्वीकृत संख्या के कई गुना है।

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राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में प्रदेश से बाहर के वाइस चांसलर की नियुक्ति का भारी विरोध

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 04 मार्च 2025 | जयपुर : राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में वाइस चांसलर (VC) के पद पर हुई डॉ. प्रमोद येवले की नियुक्ति का एक तरफ विरोध तो दूसरी तरफ समर्थन शुरू हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की राजस्थान ब्रांच और राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) ने आज राज्यपाल को पत्र लिखा।

राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में प्रदेश से बाहर के वाइस चांसलर की नियुक्ति का भारी विरोध

इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पुनर्विचार नहीं करने पर IMA ने भविष्य में आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ ने डॉ. येवले की नियुक्ति का समर्थन करते हुए राज्यपाल को बधाई संदेश भेजा है।

राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में प्रदेश से बाहर के वाइस चांसलर की नियुक्ति का भारी विरोध

आईएमए राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. एमपी शर्मा और सचिव डॉ. पीसी गर्ग की ओर से लिखे गए इस पत्र में बताया- VC के पद पर गैर चिकित्सक की नियुक्ति काे लेकर पूरे चिकित्सा समुदाय में रोष है। इस नियुक्ति को न केवल मेडिकल शिक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया, बल्कि चिकित्सा जगत के पेशेवरों के अधिकारों का हनन भी बताया।

उन्होंने बताया- राज्यों में मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना इसलिए की गई थी, ताकि उनके अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों को जोड़ा जा सके। जब से राज्यों में मेडिकल यूनिवर्सिटी बनी है, तब से वहां डॉक्टर जिसके पास MBBS, MD, Mch या DM की मेडिकल संबंधित उच्च शिक्षा की डिग्री है, उन्हें ही वीसी बनाया गया है।

वर्तमान में जब मेडिकल कॉलेजों में गैर चिकित्सक को फैकल्टी के तौर पर नियुक्त नहीं किया जाता, तो मेडिकल यूनिवर्सिटी में गैर चिकित्सक को कैसे VC नियुक्त किया जा सकता है। आपको बता दें कि डॉ. येवले महाराष्ट्र में सीनियर फार्मासिस्ट रह चुके हैं और महाराष्ट्र की डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रह चुके है।

आईएमए ने इसे सरकार की हठधर्मिता बताते हुए इसे चिकित्सा क्षेत्र के हितों पर कुठाराघात बताया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस पर पुनर्विचार नहीं करेगी तो मजबूरन सभी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों और चिकित्सा समुदाय को विरोध-प्रदर्शन करके आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी।

नियुक्ति के समर्थन में पत्र

इधर राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर डॉ. येवले को वाइस चांसलर बनाए जाने का समर्थन किया है। संघ अध्यक्ष तिलक चंद शर्मा ने पत्र लिखकर इसे एतिहासिक निर्णय बताया।

पहले भी लिखा था पत्र

IMA ने जब VC के इंटरव्यू हुए थे, तब भी ऐसा ही एक पत्र राज्यपाल को लिखकर डॉ. येवले का विरोध जताया था। उस समय चर्चा थी कि एक गुट IMA के जरिए इस इंटरव्यू को निरस्त करवाना चाहता है। इस विरोध के चलते इंटरव्यू का परिणाम भी एक माह की देरी से जारी किया गया।

यह भी पढ़ें : राजस्थान में बाहरी कुलपतियों की नियुक्ति का सिलसिला शुरू, जहाँ से राज्यपाल वहीं से कुलपतियों के चयन की कहानी, उच्च शिक्षा के बेड़ा ग़र्क

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