‘एसओजी ने असली पेपरलीक माफिया पर कार्रवाई नहीं की तो सत्याग्रह करूंगा’ डॉ किरोड़ी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 24 जुलाई 2024 | जयपुर : मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके सवाई माधोपुर विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। वे बुधवार दोपहर करीब सवा दो बजे एसओजी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने एसओजी के एडीजी वीके सिंह को तीन भर्ती एग्जाम आरएएस, REET और एसआई में हुए पेपर लीक के सबूत सौंपे।

‘एसओजी ने असली पेपरलीक माफिया पर कार्रवाई नहीं की तो सत्याग्रह करूंगा’ डॉ किरोड़ी

भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर में एसओजी (विशेष अभियान दल) के कार्यालय में पेपर लीक मामले को लेकर महत्वपूर्ण सबूत सौंपे हैं। मीणा ने RAS, SI, और रीट पेपर लीक से जुड़े कई साक्ष्य प्रस्तुत किए और आरोप लगाया कि इस मामले के मास्टरमाइंड भूपेंद्र सारण ने एसओजी के अधिकारियों और एक सिपाही को 64 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।

‘एसओजी ने असली पेपरलीक माफिया पर कार्रवाई नहीं की तो सत्याग्रह करूंगा’ डॉ किरोड़ी

उन्होंने कहा- इन सबूत से एसओजी को बड़े मगरमच्छों को पकड़ने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एसओजी के कई अधिकारियों के कारण पेपरलीक के खेल का खुलासा नहीं हो पाया। जयपुर में एसओजी ऑफिस के बाहर मीडिया से बातचीत करते किरोड़ी लाल मीणा।

जयपुर में एसओजी ऑफिस के बाहर मीडिया से बातचीत करते किरोड़ी लाल मीणा। - Dainik Bhaskar

मीडिया से बातचीत में किरोड़ी ने कहा- उदाराम और सुरेश ढाका (सीनियर टीचर भर्ती पेपरलीक का मास्टरमाइंड) को एसओजी इंस्पेक्टर मोहन पोसवाल ने फरार करवा रखा है। मैं एडीजी को कहकर आया हूं, जिस दिन उदाराम और सुरेश ढाका पकड़े जाएंगे।

पूर्ववर्ती सरकार के आधा दर्जन से ज्यादा नेता पकड़ में आएंगे, जिन्होंने पेपरलीक करवाया है। उदयराम और सुरेश के पास कई जानकारी है, जिनकी गिरफ्तारी जल्द से जल्द करने के लिए कहा है। किरोड़ी ने कहा- आरपीएससी चेयरमैन संजय श्रोत्रिय ने भी कई कबाड़े किए हैं, उसकी भी जानकारी एडीजी को दी गई है।

उन्होंने कहा- आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा के पेपर लीक में शिवसिंह राठौड़ और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्राइवेट लोगों के हाथों में देकर भ्रष्टाचार करने में RPSC के वर्तमान अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय की भूमिका है।

किरोड़ी लाल मीणा पेपर लीक के सबूत लेकर एसओजी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने एसओजी के एडीजी वीके सिंह को तीन भर्ती एग्जाम में हुए पेपर लीक के सबूत सौंपे।

किरोड़ी लाल मीणा पेपर लीक के सबूत लेकर एसओजी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने एसओजी के एडीजी वीके सिंह को तीन भर्ती एग्जाम में हुए पेपर लीक के सबूत सौंपे।

पोसवाल ने अपना मोबाइल जब्त नहीं किया

किरोड़ी ने कहा- कॉन्स्टेबल भर्ती मामले में हुई धांधली को लेकर कोर्ट ने मोहन पोसवाल से पूछा था कि उनको जानकारी कहां से मिली तो मोहन ने कहा कि मेरे मोबाइल पर वॉट्सऐप मैसेज आया था। कोर्ट ने कहा कि क्या आपने अपना मोबाइल जब्त किया, तो पोसवाल ने कहा- जब्त नहीं किया। कोर्ट ने पूछा कि सूचना किसने दी। पोसवाल ने कहा कि मुझे यह जानकारी उदाराम ने दी।

नेताओं के फोन पर एसओजी के अधिकारियों ने काम किया

किरोड़ी ने कहा- एसओजी के उन अधिकारियों की गिरफ्तारी मांग की गई है, जिन लोगों ने राजस्थान के युवाओं के साथ खिलवाड़ किया। जिन नेताओं के फोन पर एसओजी के अधिकारियों ने काम किया, उनकी भी गिरफ्तारी होनी चाहिए। एसओजी ने कार्रवाई नहीं की तो मैं सत्याग्रह करूंगा।

उन्होंने कहा- पूर्ववर्ती सरकार ने जमकर नकल माफिया को पनपाया। एसओजी के अधिकारियों ने भी उनका साथ दिया है। एसओजी के उन अधिकारियों का नाम भी एडीजी एसओजी को देकर आया हूं, क्योंकि उनके इशारे पर ही पेपरलीक का यह खेल नहीं खुला, जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग उस दौरान सड़क पर उतरे थे।

भूपेंद्र सारण का मिला था लेटर, एसओजी ने ली थी रिश्वत

किरोड़ी ने एक लेटर दिखाते हुए बताया कि मुझे यह लेटर 10 दिसंबर 2022 को डाक से मिला था। यह पेपरलीक के आरोपी भूपेंद्र सारण का है, जो जेल में है। इस लेटर में उसने यह बताया कि मुझसे एसओजी के लोगों ने रिश्वत के तौर पर 64 लाख रुपए लिए हैं, इसलिए मैंने कहा है ये सच्चा है। जब एसओजी मिल गई तो फिर कुछ नहीं बचने वाला है।

किरोड़ी ने बताया कि जो पत्र एसओजी के एडीजी को दिया गया है, उसमें तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों के नाम व जानकारी है। इन लोगों ने जिम्मेदार सीट पर बैठ कर कई बेगुनाहों को फंसाया और आरोपियों को छोड़ दिया। उन्होंने चेताया- यदि 15 दिन में इन अधिकारियों के खिलाफ एसओजी ने एक्शन नहीं लिया तो वह एसओजी के सामने बैठ कर सत्याग्रह करेंगे।

किरोड़ीलाल मीणा ने 2018 की आरएएस परीक्षा में तत्कालीन अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ की भूमिका पर संदेह जताया।

आरएएस परीक्षा में हेराफेरी के सबूत दिए

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आरएएस भर्ती परीक्षा के सबूत भी सौंपे हैं। डॉ. किरोड़ी ने बताया- उनके हाथ में एक कॉपी लगी है, जिसके हर पेज पर नॉट अटेम्प्ट ​लिखा हुआ है। इसका मतलब है कि जिस रोल नंबर की यह कॉपी है, उसने परीक्षा दी ही नहीं, लेकिन परीक्षा होने के बाद इस कॉपी को भरा गया और जांच करने वाले से उसे पास कराया गया। यह व्यक्ति अभी राजस्थान में आरएएस लगा हुआ है।

उन्होंने कहा- कांग्रेस सरकार ने ऐसे दर्जनों लोगों को आरएएस बनाया। उन्होंने बताया कि आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन शिव सिंह राठौड़ ने ऐसा किया है, जिसकी जानकारी एडीजी को देकर आया हूं। किरोड़ी बोले- आरपीएससी के चेयरमैन संजय श्रोत्रिय ने भी उस समय जमकर कबाडे़ किए हैं। इसकी जानकारी भी एडीजी को दी है और कड़ी कार्रवाई के लिए कहा है।

आरएएस परीक्षा में हेराफेरी के सबूत 

  • आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा के पेपर लीक में शिवसिंह राठौड़ की भूमिका और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्राइवेट लोगों के हाथों में देकर भ्रष्टाचार करने में वर्तमान अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय की भूमिका है।
  • भूपेंद्र यादव 1 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत हुए और 2 दिसंबर 2021 को शिवसिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया। ऐसे में आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा के प्रश्न-पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी स्वतः ही शिवसिंह राठौड़ पर आ गई।
  • शिवसिंह राठौड़ ने कार्यवाहक अध्यक्ष बनने के बाद 18 दिसंबर 2021 को अपने टि्वटर (X) अकांउट से एक ट्वीट किया। ट्वीट आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा के प्रश्न-पत्र द्वितीय के खंड-स भूगोल का 13वां प्रश्न है, जो कि 10 अंक का था यानी शिवसिंह राठौड़ ने आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्रों को पैसे लेकर अपने चहेतों को बेचा।
  • संजय श्रोत्रिय को आरपीएससी अध्यक्ष 16 फरवरी 2022 को नियुक्त किया, जो वर्तमान में भी कार्यरत है।
  • रीट में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डीपी जारौली ने रामकृपाल मीणा, प्रदीप पाराशर राजीव गांधी स्टडी सर्किल के निजी शिक्षकों को जिम्मेदारी दी। इस कारण रीट का पेपरलीक हुआ। उसी तर्ज पर संजय श्रोत्रिय ने भी निजी कॉलेजों के शिक्षकों को आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा की कॉपी जांचने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे डाली।
  • आरएएस मुख्य परीक्षा का तृतीय पेपर लोक प्रशासन विषय के यूनिट-2, जो 65 अंक का है। उस प्रश्न-पत्र को अनुभवहीन शिक्षकों को जांचने की जिम्मेदारी दी।
  • ओटीएस से सेवानिवृत आर. के. चौबीसा को लोक प्रशासन के प्रश्नों को कॉपी जांचने का हेड कॉर्डिनेटर बनाया गया। जिसने लोक प्रशासन के प्रश्नों को जांचने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की बजाय प्राइवेट कॉलेज की अनुभवहीन शिक्षक रीटा माथुर को दी।
  • प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षक रीटा माथुर, मनीषा माथुर, इंदु शर्मा, अर्चना मिश्रा, रूपाली भदौरिया, पवन शर्मा, प्रीति अग्रावत को RAS मुख्य परीक्षा की कॉपी जांचने की जिम्मेदारी दी।
  • इसी प्रकार सभी प्रश्न-पत्रों की जांचने की जिम्मेदारी निजी कॉलेजों के शिक्षकों को दी गई।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरएएस-2021 की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को अंकों में हेराफेरी करवाने की मंशा से दोनों बार निजी संस्थाओं से जुड़े शिक्षकों से जांच करवाई गई।

आरएएस परीक्षा-2018 में तत्कालीन अध्यक्ष शिवसिंह राठौड़ की भूमिका पर संदेह

किरोड़ी ने आरएएस-2018 भर्ती परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 13 जुलाई 2021 को इसका रिजल्ट घोषित करना था। इसके बाद आरटीआई के तहत कॉपी को वेबसाइट पर अपलोड करने का काम करना था।

लेकिन ये काम 6 महीने बाद यानी 2 दिसंबर 2021 को शिवसिंह राठौड़ के कार्यवाहक अध्यक्ष बनने के बाद किया गया। 17 दिसंबर 2021 को इसका नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके बाद ये कॉपी 10 जनवरी 2022 से 30 अप्रैल 2022 तक अपलोड की गई।

किरोड़ी ने आरोप लगाया कि शिवसिंह राठौड़ अपने चहते अभ्यर्थियों का मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जांच के दौरान अंक नहीं दे पाया तो उन्होंने छोडे़ गए प्रश्नों को अभ्यर्थियों द्वारा भरवाया और उन्हें अधिक अंक देने में कामयाब हुए, जिसका उदाहरण रोल नंबर 804088 की यह उत्तर पुस्तिका है।

RAS-2018 के परिणाम के बाद भी उत्तर पुस्तिकाओं में कई अभ्यर्थियों के द्वारा छोड़े गए प्रश्नों के उत्तर बाद में लिखवाए गए। उदाहरण के तौर पर रोल नंबर 804088 के आरएएस-2018 की मुख्य परीक्षा के प्रथम प्रश्न पत्र में 30 अंक से अधिक प्रश्नों में N.A (नॉट अटेम्प्ट) लिखा हुआ है।

जब अभ्यर्थी अच्छे अंक/रैंक लाने में कामयाब नहीं हुआ तो तत्कालीन चेयरमैन शिवसिंह राठौड़ ने उत्तर पुस्तिका अपलोड कराने में जानबूझकर देरी की और परीक्षार्थी को उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराकर छूटे हुए प्रश्नों में उत्तर भरवाए।

इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं को अपलोड करवाया। अभ्यर्थी ने तत्कालीन चेयरमैन शिव सिंह राठौड़ को लिखित में इसकी शिकायत कर अपनी कॉपी की जांच करवाने की मांग की, जिसे शिवसिंह ने तुरंत मानकर कॉपी को दोबारा चेक करवाया। इसमें नंबर बढ़ने पर अभ्यर्थी अच्छी रैंक लाकर आरएएस बनने में कामयाब रहा।

एसओजी ऑफिस में मौजूद कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया।

किरोड़ी लाल मीणा एसओजी ऑफिस पहुंचे तो वहां पर कुशलगढ़ से कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया पहले से मौजूद थीं। एडीजी वीके सिंह के रूम में किरोड़ी लाल मीणा और रमिला खड़िया की मुलाकात हुई।

शिवसिंह राठौड़ ने इंटरव्यू में किया भ्रष्टाचार ​

डॉ. किरोड़ी ने बताया- शिवसिंह राठौड़ की मंशा के अनुसार और कांग्रेस के बड़े नेताओं से मिलकर भूपेंद्र यादव को 13, 14, 15, 16 अप्रैल 2021 को फोर्स लीव पर भिजवाया। शिवसिंह की मंशा के अनुसार साक्षात्कार (इंटरव्यू) बोर्ड का अध्यक्ष बना।

पैसे लेकर मुख्य परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले सैकड़ों अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में रिकॉर्ड तोड़ 70% से 80% नंबर तक दिए। इनमें बड़े-बड़े नेताओं और अफसरों के रिश्तेदार शामिल हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की कॉपियां जब्त कर सजा देने की मांग की है।

5 महीने पहले 400 कैंडिडेट की सौंप चुके लिस्ट

पांच महीने पहले किरोड़ी लाल मीणा ने एसओजी ऑफिस पहुंचकर एसआई भर्ती 2021 में नकल गिरोह से जुड़े सबूत पेश किए थे। उन्होंने एसओजी एडीजी वीके सिंह काे भर्ती में करीब 400 अभ्यर्थियों का पेपर लीक से फर्जी चयन होने के डॉक्युमेंट दिए। इसके अलावा उन्होंने आरएएस-2018 और 2021 में भी अभ्यर्थियों का फर्जी चयन होने का दावा करते हुए सबूत दिए और जांच की मांग उठाई थी।

गौरतलब है कि किरोड़ी लाल ने इससे पहले ईडी में भी जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर दस्तावेज दिए थे। इसके बाद ईडी ने इस केस में एक के बाद एक बड़े ठेकेदारों और अधिकारियों को गिरफ्तार किया।

मीणा का अंतिम अल्टीमेटम

किरोड़ी लाल मीणा ने एसओजी में सबूत पेश करते हुए कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि इस दौरान कार्रवाई न होने पर वे सख्त कदम उठाएंगे। किरोड़ी लाल मीणा द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों ने पेपर लीक मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।

एसओजी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों से मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब देखना यह है कि एसओजी इन सबूतों के आधार पर क्या कदम उठाती है और जांच में क्या नए खुलासे होते हैं। मीणा के अल्टीमेटम के चलते मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है।

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इससे पहले 21 मार्च को जस्टिस वर्मा के बंगले से 15 करोड़ रुपए कैश मिलने की बात सामने आई थी। 14 मार्च को होली के दिन उनके घर में आग लग गई थी। फायर सर्विस की टीम जब उसे बुझाने गई तो स्टोर रूम में उन्हें बोरियों में भरे 500-500 रुपए के अधजले नोट मिले थे।

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दिल्ली HC जज के सरकारी बंगले में आग लगी। वहां दमकल कर्मियों को जले हुए 500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिलीं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिलने का वीडियो जारी किया है। 65 सेकेंड के वीडियो में नोटों से भरी बोरियां दिखाई दे रही हैं।

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जांच का समय तय नहीं, 3 सदस्यीय कमेटी बनी

CJI खन्ना के आदेश पर बनाई गई तीन सदस्यीय जांच समिति में जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस), जी एस संधावालिया (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल हैं। जांच समिति कितने समय में जांच पूरी करेगी। इसके लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है।

उनके मोबाइल फोन की जांच करने के आदेश भी दिए गए हैं। इस मामले में जस्टिस वर्मा ने कहा है कि घटना के समय वे घर में मौजूद नहीं थे और उन्हें फंसाया जा रहा है। अगर जांच कमेटी इस नतीजे पर पहुंचती है कि आरोप सही हैं, तो जस्टिस वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए CJI संजीव खन्ना ये कदम उठा सकते हैं…

  • CJI संजीव खन्ना जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • अगर जस्टिस वर्मा CJI की सलाह को नहीं मानते हैं तो वे दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को उन्हें कोई काम न देने का आदेश जारी करेंगे।
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राजस्थान में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने, कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 09 मार्च 2025 | जयपुर :  प्रदेश में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने और कोचिंग सेंटर पर कंट्रोल के लिए सरकार बिल लायेगी। सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट कंट्रोल्ड एंड रेगुलेशन बिल 2025 को मंजूरी दी गई है। विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में ही इस बिल को पारित करवाने की तैयारी है।

राजस्थान में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्या रोकने, कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

बिल के प्रावधानों के मुताबिक 50 या इससे ज्यादा विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटर्स को कानूनी दायरे में लाया जायेगा। 50 या इससे ज्यादा स्टूडेंट वाले कोचिंग सेंटर्स को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। प्रदेश में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट कंट्रोल्ड एंड रेगुलेशन अथॉरिटी का गठन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के प्रभारी सचिव इस अथॉरिटी के अध्यक्ष होंगे।

कोचिंग सेंटर कंट्रोल के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

पोर्टल और एप बनेगा

कोचिंग सेंटर्स पर मॉनिटरिंग और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक राज्य स्तरीय पोर्टल और काउंसिलिंग के लिए हेल्पलाइन भी बनाई जाएगी। इस बिल के कानून के बाद हर कोचिंग सेंटर को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य हो जायेगा।

कोचिंग सेंटर्स पर निगरानी बढ़ेगी, फीस लौटाने के प्रावधान भी होंगे

बिल में कोचिंग सेंटर्स पर निगरानी और नियंत्रण के कड़े प्रावधान होंगे। कोचिंग सेंटर्स मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। स्टूडेंट्स को तनाव मुक्त माहौल देना होगा। स्टूडेंट की मेंटल हेल्थ को ध्यान में रखना होगा। बीच में कोचिंग छोड़ने वाले स्टूडेंट्स को फीस लौटाने के प्रावधान भी बिल में शामिल होंगे। जोगाराम पटेल ने कैबिनेट के के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और संपत्ति जब्त करने तक के प्रावधान

कोचिंग सेंटर पर कंट्रोल वाले बिल में नियमों के उल्लंघन पर कड़ी करवाई का प्रावधान है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा- कोचिंग में पढ़ने वाले युवाओं में जिस तरह का तनाव बढ़ रहा था और जो घटनाएं हो रही थी, वो चिंताजनक थी। बिल में कोचिंग सेंटरों की मान्यता रद्द करने, भारी जुर्माना लगाने और लैंड रेवेन्यू एक्ट के हिसाब से जब्ती तक के प्रावधान होंगे।

जोगाराम पटेल ने कैबिनेट के के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

राज्य की नई कौशल नीति को मंजूरी, नीति में कई प्रावधान

कैबिनेट ने राज्य की नई कौशल नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के अनुसार इंडस्ट्री की मांग के अनुसार कुशल प्रोफेशनल और कामगार तैयार किए जायेंगे। युवाओं को इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से स्किल डवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार पाने के योग्य बनाया जायेगा।

आईटीआई को उन्नत कौशल विकास केंद्र के तौर पर विकसित करेंगे

नई कौशल नीति के अनुसार प्रदेश की सभी आईटीआई को नए जमाने के हिसाब से उन्नत कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। संभाग मुख्यालय में मॉडल करियर सेंटर बनाये जायेंगे। वहां पर युवाओं को करियर काउंसिलिंग से लेकर इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जायेगी।

प्रदेश भर में अलग-अलग सेक्टर के अनुभवी श्रमिकों के कौशल का सर्टिफिकेशन किया जायेगा। इसके लिए कैंप लगाए जायेंगे। स्किल यूनिवर्सिटी का मॉडर्नाइजेशन करके विशेष कौशल केंद्र बनाए जायेंगे।

प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर नीति को मंजूरी

कैबिनेट में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर नीति 2024 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत सरकारी दफ्तरों में विशेष योग्यजन की एंट्री को आसान और बाधा मुक्त बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के सभी संस्थाओं में ऐसी सुविधा विकसित की जायेगी, जिससे कि दिव्यांगजनों को आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हो।

यह भी पढ़ें : फर्जी डिग्री सरगना जेएस यूनिवर्सिटी के कुलपति, रजिस्ट्रार और दलाल गिरफ्तार

दिव्यांग कर्मचारी के लिए भी सभी सरकारी दफ्तर में उनके सुविधा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जायेगा। सारी सुविधाएं भारत सरकार के मापदंडों के हिसाब से विकसित की जाएगी, इसके तहत रैंप बनाने से लेकर इजी अप्रोच के लिए जरूरी सभी संसाधन विकसित किये जायेंगे।

दिव्यांगों के तबादले कम से कम होंगे, रोटेशनल ट्रांसफर से मुक्त रखेंगे

इस नीति के तहत दिव्यांगों को रोटेशनल टाइप ट्रांसफर से मुक्त रखा जायेगा और उनके तबादले कम से कम हो यह कोशिश होगी। हर विभाग दिव्यांगों की भर्ती की देखरेख उनकी नियुक्ति और उनके रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिए संपर्क अधिकारी को नियुक्त करेगा।

कर्मचारियों को अब ग्रेच्युटी का लाभ 1 जनवरी 2024 से मिलेगा

सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के अनुसार 1 जनवरी से बढ़ी हुई ग्रेजुएट ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दी है। सरकार ने बजट में इसकी घोषणा की थी। राज्य सरकार ने रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेट ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा हाली 20 लाख से बढ़कर 25 लख रुपए की है।

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